BJP के बाद RSS नेताओं से मिलेगा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का डेलीगेशन
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और चीन के बीच साल 2024 में शुरू हुई सुधार की प्रक्रिया अब राजनीतिक स्तर पर भी दिखाई देने लगी है. गलवान संघर्ष के बाद पहली बार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर है.
उप-मंत्री सुन हायन के नेतृत्व में इस छह सदस्यीय दल ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की और अब मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को यह दल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं से मुलाकात करने वाला है.
भाजपा मुख्यालय में हुई बैठक के दौरान दोनों दलों के बीच आपसी संचार और संपर्क बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई. इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेशी मामलों के विभाग के प्रमुख विजय चौथाईवाले मौजूद थे, साथ ही भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग भी शामिल हुए.
आरएसएस के शताब्दी वर्ष के दौरान हो रही यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसे दोनों देशों के बीच 'कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर' यानी विश्वास बहाली के उपाय के तौर पर देखा जा रहा है.
हालांकि, आरएसएस ने अपने शताब्दी वर्ष के मुख्य समारोह में चीनी प्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया था, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए यह वार्ता अहम है.
यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में हो रही है जब पिछले साल से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो चुकी है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बहाल कर दी गई हैं.
साथ ही, अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक तनाव की पृष्ठभूमि में चीन के साथ बढ़ती यह नजदीकी वैश्विक स्तर पर भी ध्यान खींच रही है.
भाजपा और आरएसएस के अलावा, यह चीनी प्रतिनिधिमंडल आने वाले दिनों में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के नेतृत्व वाले एक दल से भी मुलाकात कर सकता है.