अफ्रीका टूटेगा, बीच में बनेगा नया महासागर
नई दिल्ली । डेस्क: वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है, जिसमें अफ्रीका महाद्वीप के टूटने और उसके बीच में एक नए महासागर के बनने की संभावना जताई गई है. यह सब पृथ्वी की गहराई में होने वाली 'भूगर्भीय धड़कन' की वजह से हो सकता है, जो लावा की गतिविधियों से जुड़ी है. 'नेचर जियोसाइंस' पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में इसकी जानकारी दी गई है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रक्रिया करोड़ों वर्षों में पूरी होगी, लेकिन इसके प्रभाव से पृथ्वी की जलवायु पर असर पड़ेगा और बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड व सल्फर डाइऑक्साइड निकलेगा.
शोध के अनुसार, इथियोपिया के अफार क्षेत्र में भूगर्भ से लगातार लावा निकल रहा है, जिससे चट्टानें कमजोर हो रही हैं. यहां भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट आम हैं. यह क्षेत्र तीन टेक्टोनिक प्लेट्स - लाल सागर प्लेट, एडेन की खाड़ी प्लेट और मुख्य इथियोपियन प्लेट - का मिलन स्थल है, जिसे 'ट्रिपल जंक्शन' कहा जाता है.
वैज्ञानिकों ने 130 ज्वालामुखियों से निकले लावा का अध्ययन किया और पाया कि मेंटल लेयर में लावा की धड़कन जैसी गतिविधि ऊपरी चट्टानों पर दबाव डाल रही है, जिससे दरारें बन रही हैं.
इससे सोमाली प्लेट नूबियन प्लेट से अलग हो जाएगी, और बीच में गहरी घाटी बनेगी. लाखों वर्षों में लाल सागर और एडेन की खाड़ी का पानी इसमें भर जाएगा, जिससे नया महासागर बनेगा. अफ्रीका का 'हॉर्न' हिस्सा मुख्य महादेश से अलग हो जाएगा.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी तरह अटलांटिक महासागर ने यूरोप को उत्तरी अमेरिका से अलग किया था. भविष्य में युगांडा, रवांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो जैसे देश समुद्र तट पर होंगे, जो अभी समुद्र से दूर हैं.
शोध के प्रमुख लेखक टॉम गार्नन ने बताया कि मेंटल में लावा की विविधता और उसकी गतिविधि से नई समुद्री घाटियां बनती हैं. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि लावा के साथ निकलने वाले गैसों से जलवायु परिवर्तन तेज होगा और कई प्रजातियां विलुप्त हो सकती हैं.
हालांकि, यह बदलाव एक-दो साल में नहीं, बल्कि करोड़ों वर्षों में होगा. आगे के शोध से भूकंपों की भविष्यवाणी संभव हो सकेगी, जिससे प्रशासन सतर्क रह सकेगा.
यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि करोड़ों वर्ष पहले इसी प्रक्रिया से दक्षिण अमेरिका अफ्रीका से अलग हुआ था. वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी की यह 'धड़कन' एक पूरे महादेश को तोड़ सकती है और नया महासागर जन्म दे सकती है. (फोटो- प्रतीकात्मक)