रायगढ़ में अडानी के 2,470 एकड़ से ज्यादा वन भूमि पर कोयला खनन का रास्ता साफ
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अडानी के करीब 2,470 एकड़ वन भूमि पर दो अलग-अलग कोयला खनन परियोजनाओं का रास्ता साफ हो गया है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee-FAC) ने दोनों परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग को प्रथम चरण (स्टेज-1) की सैद्धांतिक मंजूरी देने की सिफारिश की है. हालांकि, अंतिम स्वीकृति मिलने से पहले परियोजनाओं को प्रतिपूरक वनीकरण समेत कई निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा.
समिति की सिफारिश के अनुसार पहली परियोजना सरकारी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की पेलमा ओपनकास्ट कोयला खदान से जुड़ी है. इस परियोजना के लिए 360 हेक्टेयर से अधिक, यानी लगभग 890 एकड़ वन भूमि के उपयोग का प्रस्ताव है. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में एसईसीएल ने इस खदान के संचालन के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी पेलमा कोलियरीज लिमिटेड के साथ माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर समझौता किया था.
दूसरी परियोजना अदाणी समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड के पुरुंगा भूमिगत कोयला ब्लॉक से संबंधित है. इस परियोजना के लिए 620 हेक्टेयर से अधिक, यानी लगभग 1,530 एकड़ वन भूमि के उपयोग का प्रस्ताव रखा गया है.
दोनों परियोजनाओं को मिलाकर करीब 980 हेक्टेयर (लगभग 2,420 से 2,470 एकड़) वन भूमि का डायवर्जन प्रस्तावित है. वन सलाहकार समिति ने अपनी बैठक में इन प्रस्तावों पर विचार करने के बाद स्टेज-1 यानी सैद्धांतिक वन स्वीकृति की अनुशंसा की है.
रायगढ़ जिला पहले से ही कोयला खनन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है. ऐसे में हजारों एकड़ वन भूमि के प्रस्तावित डायवर्जन को लेकर पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. परियोजनाओं पर अंतिम निर्णय अब स्टेज-1 की शर्तों के अनुपालन और केंद्र सरकार की अंतिम स्वीकृति पर निर्भर करेगा.