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FIR दर्ज होने से पहले आरोपी को सुनवाई का अधिकार नहीं- छत्तीसगढ़ HC

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19 मार्च 2026, 02:09 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी संभावित आरोपी को आपराधिक कार्यवाही शुरू होने या एफआईआर (FIR) दर्ज होने से पहले सुने जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल के तत्कालीन संयुक्त संचालक और अधीक्षक द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश सुनाया. 


याचिकाकर्ता ने अस्पताल में पेट-सीटी स्कैन और गामा कैमरा मशीनों की खरीद में हुई कथित गड़बड़ियों और लगभग 18.45 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामले में अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश को चुनौती दी थी.


मामले के अनुसार, एक आंतरिक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रक्रियात्मक खामियों और वित्तीय मंजूरी के अभाव के गंभीर आरोप लगाए थे. याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया था कि एफआईआर की सिफारिश मनमानी है और जांच समिति ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका न देकर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है. 


हालांकि, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि जांच समिति केवल तथ्य खोजने वाला निकाय थी और पुलिस को संज्ञेय अपराधों की जांच करने का स्वतंत्र अधिकार है.


हाई कोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) का हवाला देते हुए कहा कि कानून एफआईआर दर्ज करने से पहले सुनवाई का प्रावधान नहीं करता है. अदालत ने टिप्पणी की कि अपराध की रिपोर्टिंग के चरण में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य नहीं है. 


कोर्ट ने पाया कि खरीद प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरणों में याचिकाकर्ता सक्रिय रूप से शामिल थे और चूंकि मामला भारी सार्वजनिक राशि की अनियमितता से जुड़ा है, इसलिए जांच में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. इस आदेश के साथ ही अदालत ने पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को मामले में जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP