पिता के लिए फरिश्ता बना 9 साल का बेटा! ब्लड कैंसर से दिलाई जीत
कैलिफ़ोर्निया । डेस्क: क्रोनिक मायेलॉयड ल्यूकेमिया जिसे आसान भाषा में "ब्लड कैंसर" कहते हैं, यह एक जानलेवा बीमारी है जो तेजी से फैलती है और बार-बार लौट सकती है. इस कैंसर के अंतिम चरण में पकड़े जाने पर मरीज को बचाना लगभग असंभव हो जाता है. अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया के निवासी निक मोंडेक भी इसी घातक बीमारी से जूझ रहे थे.
२०२२ में निक को ब्लड कैंसर का पता चला. कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी जैसे उपचारों के बावजूद कैंसर कोशिकाएं तेजी से फैल रही थीं और बार-बार लौट रही थीं. क्रोनिक मायेलॉयड ल्यूकेमिया का मुख्य लक्षण एनीमिया है, जो तब होता है जब मायेलॉइड ऊतकों से श्वेत रक्त कणिकाएं अनियंत्रित दर से बनने लगती हैं, जिससे शरीर में खून की कमी हो जाती है.
पारंपरिक उपचार जैसे कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के अलावा, कुछ मामलों में बोन मैरो प्रत्यारोपण भी किया जाता है. हालाँकि, निक के मामले में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण भी सफल नहीं हुआ.
जब डॉक्टरों ने देखा कि कोई और रास्ता नहीं बचा है, तो उन्होंने स्टेम सेल थेरेपी का फैसला किया. इस थेरेपी के लिए एक उपयुक्त डोनर की जरूरत थी. निक के लिए यह भूमिका उनके 9 साल के बेटे स्टीफन ने निभाई. इस नन्हे फरिश्ते ने अपने शरीर के लगभग 60 लाख स्टेम सेल अपने पिता को दान किए.
कैलिफ़ोर्निया के डॉक्टरों के अनुसार, स्टीफन शायद अब तक का दुनिया का सबसे कम उम्र का स्टेम सेल डोनर है, जिसने अपने शरीर की कोशिकाओं से अपने पिता की जान बचाई है.
स्टेम सेल क्या हैं? स्टेम सेल शरीर की वे खास कोशिकाएं होती हैं जिनसे अन्य प्रकार की कोशिकाएं जैसे अस्थि, उपास्थि, रक्त और लसीका तंत्र की कोशिकाएं बनाई जा सकती हैं. रक्त कैंसर में, रक्त कणिकाएं बनाने वाली कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. उनकी जगह स्वस्थ स्टेम सेल प्रत्यारोपित करके कैंसर के विकास को रोका जा सकता है.
चूँकि स्टीफन के शरीर में निक के जीन मौजूद हैं और रक्त समूह में भी मेल है, इसलिए उनके द्वारा दान किए गए स्टेम सेल ने "जादू" जैसा काम किया. बेटे की मदद से निक मोंडेक ने कैंसर की इस जंग को जीत लिया.