जल जीवन मिशनः 5 साल में मात्र 56 गांवों में पहुंचा पानी
छत्तीसगढ़ जल जीवन मिशनः 5 साल में 56 गांवों में पहुंचा पानी
अंबिकापुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के सरगुजा में जल जीवन मिशन का काम काफी सुस्त गति से चल रहा है. विगत पांच साल में यहां के मात्र 56 गांवों में ही घर-घर पानी पहुंच सका है.
जबकि शासन द्वारा जिले के 569 ग्राम पंचायतों का चयन शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए किया गया है. शेष बचे हुए 513 गांवों में अभी भी काम अधूरे हैं.
हालांकि विभाग का कहना है कि मार्च तक करीब 100 गांवों में घर-घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है.
जल जीवन मिशन के तहत केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा सरगुजा जिले में 569 गांवों का चयन किया गया है.
इन चयनित गांवों में से 189 गांवों में समूह द्वारा जल प्रदाय योजना के तहत पेयजल पहुंचाने का निर्णय लिया गया है.
जबकि 380 गांवों में बोर खनन कर पानी टंकी के माध्यम से पानी पहुंचाने की योजना है.
धीमी गति से शुरू हुआ काम
जल जीवन मिशन के तहत साल 2019-20 में सभी योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई थी. लेकिन काम काफी धीमी गति से शुरू हुआ.
निर्माण प्रारंभ होते-होते साल 2020 हो गया. इसके लिए स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को एजेंसी बनाया गया था.
विभाग ने टेंडर निकाले और अलग-अलग ठेकेदारों को काम का टेंडर दिया.
ठेकेदारों ने काम शुरू कर पाइप लाइन, घरों में नल और टंकी बनाने का काम शुरू किया.
ठेकेदारों की लापरवाही के चलते काम काफी धीमी गति से शुरू हुआ. जिसके चलते मात्र 9 योजनाओं को ही पूरा कर सका.
इस बीच निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने के कारण कार्यपालन अभियंता को निलंबित भी किया गया. इसके बाद जरूर काम में थोड़ी तेजी आई.
380 गांवों में 749 परियोजनाओं की स्वीकृति
बताया गया कि विभाग द्वारा हर गांव की आबादी और भौगोलिक स्थितियों के अनुसार घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने अलग-अलग परियोजनाएं तैयार की है.
योजना के तहत स्वीकृत 380 गांवों में 749 परियोजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई.
गांव की आबादी के अनुसार किसी गांव में 3 तो किसी गांव में चार परियोजनाओं के तहत निर्माण शुरू किया गया.
जिन गांवों में बिजली की समस्या है. उन गांवों के लिए सोलर पंप से पेयजल आपूर्ति करने की व्यवस्था की गई है.
दूसरी ओर विभाग का दावा है कि अभी तक 749 परियोजनाओं में से 495 का निर्माण पूरा हो गया है. इसे प्रारंभ करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
विभाग का कहना है कि जिन ग्राम पंचायतों में काम पूर्ण हो गया है. वहां ग्राम सभा बुलाकर परियोजना को ग्राम पंचायत के हवाले किया जा रहा है.
हालांकि पहले इन परियोजनाओं के संधारण एवं संचालन की नीति नहीं बनने के कारण ग्राम पंचायतें केवल पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी लेती थी.
लेकिन अब शासन ने परियोजना के संचालन एवं संधारण की नीति बनाई है. इसकी पूरी जवाबदारी पंचायत की होगी.
पंचायत द्वारा ग्रामीणों से हर महीने यूजर चार्ज वसूलेगी और परियोजना के संचालन एवं संधारण की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी.
पंचायत 60 से 100 रुपए महीने तक हर परिवार से यूजर चार्ज वसूलेगी.