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POCSO केस: छत्तीसगढ़ HC से महिला को राहत, उम्रकैद की सज़ा रद्द

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13 नव. 2025, 01:17 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) के तहत आजीवन कारावास की सज़ा पाई 23 वर्षीय महिला को बड़ी राहत दी है. हाई कोर्ट ने 11 नवंबर को महिला की सज़ा को खारिज कर दिया और उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया.


कोर्ट ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि घटना के समय पीड़ित पुरुष 18 साल से कम उम्र का था.

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जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालत ने सिर्फ स्कूल के एडमिशन रजिस्टर को उम्र का प्रमाण मानकर गलती की. कोर्ट ने ध्यान दिया कि स्कूल के हेडमास्टर ने क्रॉस-एग्जामिनेशन में माना कि उन्होंने खुद जन्मतिथि की एंट्री नहीं की थी और इसके समर्थन में कोई जन्म प्रमाण पत्र या ट्रांसफर दस्तावेज़ पेश नहीं किया गया था.


कोर्ट ने साफ कहा कि बिना पुख्ता दस्तावेज़ के केवल स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर उम्र तय नहीं की जा सकती.


बेंच ने यह भी पाया कि पुरुष की अपनी गवाही और व्यवहार से लगता है कि वह अपनी मर्ज़ी से महिला के साथ गया था. कोर्ट ने कहा, "पुरुष ने स्वीकार किया कि वह अपीलकर्ता (महिला) के साथ धरमजयगढ़ गया, एक महीने से ज़्यादा उनके साथ रहा, और बस से लौटते समय पकड़ा गया. घटना के तरीके को देखते हुए, यह सुरक्षित रूप से माना जा सकता है कि पुरुष इस कृत्य में अपनी मर्ज़ी से शामिल था."


हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि POCSO या IPC (भारतीय दंड संहिता) के तहत कोई अपराध नहीं बनता है, और महिला को दोषमुक्त कर दिया.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP