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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में 18.5 प्रतिशत ही स्मार्ट क्लासरूम

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Hupendra Sharma

14 मई 2025, 01:43 PM 5 मिनट में पढ़ें 4

स्मार्ट क्लासरूम
स्मार्ट क्लासरूम

रायपुर | ममता मानकर : केंद्र सरकार भले देश के सभी माध्यमिक विद्यालयों को इंटरनेट से जोड़ने का लक्ष्य रखा हो लेकिन आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ समेत देश के अधिकांश हिस्सों में यह मुश्किल है.


हालत ये है कि राज्य के स्कूलों की कौन कहे, हजारों गांव कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा से वंचित हैं.

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वित्त मंत्री की उम्मीदों के उलट सरकार के ही आंकड़े हैं कि देश के 6.5 लाख गांवों में से केवल 1.99 लाख यानी 30.4% गांवों में ही इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है.


साल 2025 के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के सभी माध्यमिक विद्यालयों को इंटरनेट से जोड़ने का लक्ष्य रखा है.


यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस यूडीआईएसई प्लस रिपोर्ट 2023-24 की ताज़ा रिपोर्ट से यह साफ हुआ है कि छत्तीसगढ़ के स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की तस्वीर अब भी काफी खराब है.


खास तौर पर सरकारी स्कूलों में जरूरी डिजिटल उपकरणों और सुविधाओं की भारी कमी है.


छतीसगढ़ स्मार्ट क्लास रूम के मामले में पिछड़े राज्यों की श्रेणी में है, जहां केवल 18.5 फीसदी स्मार्ट स्कूल हैं.


इस आंकड़े को इस बात से समझ सकते हैं कि चंडीगढ़ में 97.5 फीसदी, पंजाब में 87.5 फीसदी, दिल्ली में 70 प्रतिश, गुजरात में 63.3 फीसदी और महारास्ट्र में 65.9 फीसदी स्मार्ट स्कूल हैं.यूडीआईएसई प्लस रिपोर्ट से पता चलता है कि डिजिटल शिक्षा के मामले छतीसगढ़ के सरकारी स्कूल काफी पीछे हैं.

लैपटॉप-नोटबुक की उपलब्धता

फंक्शनल कार्यात्मक डेस्कटॉप/पीसीफंक्शनल डेस्कटॉप/पीसी की उपलब्धता पर नज़र डालने से पता चलता है कि राज्य में कुल 56,615 स्कूल हैं. इनमें से सिर्फ 17.6 प्रतिश स्कूलों में ही फंक्शनल कार्यात्मक डेस्कटॉप उपलब्ध हैं.


सरकारी स्कूलों में यह आंकड़ा मात्र 11.8 प्रतिशत है. निजी वित्तीय सहायता स्कूलों में यही सुविधा 56.3 फीसदी स्कूलों में है. इसी तरह 17.1 फीसदी अन्य स्कूलों यह सुविधा उपलब्ध है.


फंक्शनल (कार्यात्मक) लैपटॉप/नोटबुक की उपलब्धता की बात करें तो छत्तीसगढ़ में सिर्फ 11.8 फीसदी स्कूलों में ही फंक्शनल लैपटॉप/ नोटबुक हैं.


राज्य की कुल 4,318 सरकारी स्कूलों में सिर्फ 8.8 फीसदी स्कूलों में ही यह मौजूद है. जबकि सरकार सहायता प्राप्त 53 स्कूलों में मात्र 12.8 फीसदी स्कूलों में मौजूद है.


वहीं कुल निजी वित्तिय सहायता प्राप्त 2,2,93 स्कूलों में 32.1 फीसदी स्कूलों में ही ये सुविधा हैं. अन्य 11 स्कूलों में 4.5 फीसदी है.


फंक्शनल टैबलेट की बात करें तो कुल 9,067 स्कूलों में से सिर्फ 16 प्रतिशत में ही फंक्शनल टैबलेट उपलब्ध है. सरकारी स्कूलों में ये 17.6 प्रतिशत तक है.


वहीं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सिर्फ 1.7 प्रतिशत तक सीमित है. निजी सहायता प्राप्त 7 स्कूलों में 1.7 प्रतिशत है. अन्य 3 स्कूलों में 1.2 प्रतिशत है.


स्मार्ट क्लास रूम की उपलब्धता

स्मार्ट क्लास रूम बात करे तो डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट टीवी और वर्चुअल क्लास रूम जैसे स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा सिर्फ 19.4 प्रतिशत स्कूलों में है.


सरकारी स्कूलों में 18.5 प्रतिशत, जबकि निजी स्कूलों में ये 26.3 फीसदी तक पहुंच चुकी है.


इसी तरह निजी सहायता प्राप्त 26.3 स्कूलों में है. वहीं अन्य में मात्र 2 प्रतिशत स्कूलों में यह सुविधा उपलब्ध है.


इसी प्रकार टीचिंग के लिए मोबाइल का इस्तेमाल वाले स्कूल केवल 11 प्रतिशत स्कूलों में ही पढ़ाने के लिए फंक्शनल मोबाईल फ़ोन उपलब्ध हैं.


सरकारी स्कूलों में ये आंकड़ा 8.6 प्रतिशत है, जबकि निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में यह 27.3 प्रतिशत तक है. अन्य मेंं 8.2 प्रतिशत स्कूलों में है.


डिजिटल लाइब्रेरी की हालत

प्रदेश में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थिति सबसे कमजोर है. कुल 56,615 स्कूलों में मात्र 778 स्कूलों में ही डिजिटल लाइब्रेरी है. जो प्रतिशत में मात्र 1.4 फीसदी ही है.


इनमें से 433 सरकारी स्कूलों में यह आंकड़ा सिर्फ 0.9 प्रतिशत है. सहकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 2.2 प्रतिशत ही है.


वहीं निजी सहायता प्राप्त कुल 333 स्कूलों यानी 4.7 प्रतिशत और अन्य स्कूलों में यह सुविधा 1.2 प्रतिशत स्कूलों में है.


इसी तरह राज्य में कुल 18,094 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनमें मिडिल और सेकंडरी सेक्शन है. इनमें से सिर्फ 12 प्रतिशत स्कूलों में ही आईसीटी लैब हैं.


इनमें से भी केवल 8 फीसदी लैब्स ही फंक्शनल हैं. सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में यह आंकड़ा और भी कम है. सिर्फ 1.4 प्रतिश में आईसीटी लैब्स हैं और 0.9 प्रतिशत में ही वे फंक्शनल हैं.


क्लासरूम के लिए 537 करोड़ आवंटित

लोकसभा में पूछे गए सवाल के मुतबिक स्मार्ट क्लासरूम को सरकार के समग्र शिक्षा के तहत डिजिटल पहल घटक के माध्यम से वित्त पोषित किया जाता है, जो एक केंद्र प्रायोजित योजना है, राज्य सरकारें अपनी आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त धनराशि प्रदान करने के लिए स्वतंत्र हैं. जिसके धन का इस्तेमाल ही नही हो रहा है. 


देश भर में 2023-24 में सरकार ने समग्र शिक्षा के तहत स्मार्ट क्लासरूम के लिए 537 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन साल के अंत तक केवल 369 करोड़ रुपये (69%) ही खर्च किए गए. वही खर्च के मामले में छतीसगढ़ को देखे तो छतीसगढ़ में भी स्थिति ऐसी ही है.


साल 2023-24 में छतीसगढ़ को इस मद में 1245.6 (लाख) दिया गया लेकिन इसमें से एक रुपया भी छत्तीसगढ़ राज्य ने खर्च नहीं किया.


इसी तरह 2024-25 के मद में भी 10864 लाख की राशी छत्तीसगढ़ को दी गई लेकिन अब तक इसमें से भी छत्तीसगढ़ सरकार ने एक धेला खर्च नहीं किया है.


छतीसगढ़ में केवल वर्ष 2022-23 में ही 2421 लाख रुपये का उपयोग किया गया.


ये आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में डिजिटल शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार की आवश्यकता है. विशेषकर सरकारी स्कूलों में और अधिक जरुरत है.


सरकार को डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने, शिक्षक प्रशिक्षण, और डिजिटल सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है, ताकि सभी छात्रों को समान अवसर मिल सके. वरना तो स्कूलों को डिजीटल करने की उम्मीदें, धरी रह जाएंगी..


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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP