अब अपनी बोली में पढ़ेंगे पहली-दूसरी के बच्चे
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में नई शिक्षा नीति लागू कर दी गई है. जिसके चलते पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे अपनी मातृभाषा में हिन्दी विषय की पढ़ाई कर रहे हैं.
बच्चे जिस भाषा में बात करते हैं उन्हें उसी भाषा में पढ़ाया जा रहा है. माना गया है कि इससे बच्चे बेहतर तरीके से सीखेंगे.
इसके साथ ही आगामी शिक्षा सत्र 2025-26 में कक्षा पहली से लेकर तीसरी और छठवीं में नया पाठ्यक्रम लागू हो रहा है.
साथ ही सरकार की यह भी योजना है कि मातृभाषा में पढ़ाई की व्यवस्था कक्षा पांचवीं तक की जाए.
नई शिक्षा नीति में अनुशंसा की गई है कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होना चाहिए. यानी घरेलू भाषा, स्थानीय भाषा और क्षेत्रीय भाषा होनी चाहिए.
इसके लिए प्रदेश में 18 स्थानीय भाषा-बोली तय की गई है. इन भाषा बोलियों में छत्तीसगढ़ी, हल्बी, गोंडी, भतरी, कुडुख, गरगुजिहा, सादरी, कमारी, बैगानी, दोरली, धुरवी, बघेली, मडिया, ओडिया, बंगला, मराठी और तेलुगू शामिल हैं.
हालांकि इसमें और सुधार करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी द्वारा अभी भी काम किए जा रहे हैं.
पढ़ाने और पढ़ने में सुविधा हो इसके लिए अभ्यास प्रश्न और प्रत्येक पाठ की शब्दावली में स्थानीय भाषा तैयार करने पर काम किया जा रहा है.
इसके अलावा शिक्षकों के लिए अभ्यास पुस्तिका और मार्गदर्शिका बनाई जा रही है.
नई शिक्षा नीति के तहत पहली और दूसरी में नये पाठ्यक्रम में हिन्दी की किताब द्विभाषी तैयार कराई गई है.
एससीईआरटी द्वारा 18 स्थानीय भाषाएं और 4 प्रांतीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकें तैयार की गई हैं.
इसके अलावा कक्षा 3 से 5 तक ही हिन्दी की पाठ्य पुस्तकों में 4 स्थानीय बोली-भाषाओं के 25 प्रश्न शामिल किए गए हैं.
वर्तमान में बस्तर और सरगुजा में मातृभाषा में पढ़ाई शुरू हो गई है. नए शिक्षा सत्र के शुरुआत से ही इसे प्रदेश के सभी जगहों पर चालू कर दिया जाएगा.
इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. बस्तर संभाग में के 6937 स्कूलों में कक्षा पहली के 62375 और दूसरी के 61635 बच्चों को स्थानीय बोली-भाषा में अध्ययन कराया जा रहा है.
पहली से तीसरी और छठवीं की किताबें बदली
आगामी शिक्षा सत्र 2025-26 से चार कक्षाओं पहली, दूसरी, तीसरी और छठवीं में नया पाठ्यक्रम लागू हो रहा है. इसे एससीईआरटी के समकक्ष बनाया गया है.
नये शिक्षा सत्र से कक्षा तीसरी के बच्चे हिन्दी व गणित के साथ ही शारीरिक शिक्षा, योग और कला शिक्षा की भी पढ़ाई करेंगे.
इसी तरह कक्षा छठवीं में व्यावसायिक शिक्षा को भी शामिल किया गया है.
नई किताबों में विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और रुचियों को प्राथमिकता दी गई है.
एनसीईआरटी ने छोटे बच्चों को आसान पाठ्यक्रम से बेहतर शिक्षा देने के लिए विषय विशेषज्ञों का सहयोग लिया है. उसके अनुसार नया पाठ्यक्रम तैयार किया गया है.
नये पाठ्यक्रम में तीसरी के बच्चे हिन्दी, गणित के साथ शारीरिक शिक्षा और योग भी पढ़ेंगे.
शिक्षक बिना कैसे होगा सपना पूरा
छत्तीसगढ़ के कई स्कूल शिक्षक विहीन तो हैं ही इसके अलावा सैकड़ों स्कूल मात्र एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं.
सरकार नई शिक्षा नीति के माध्यम से पाठ्यक्रम तो अच्छा ला रही है. पर बच्चे बिना शिक्षकों के कैसे इस पाठ्यक्रम को पढ़ पाएंगे.
सवाल यही है कि शिक्षकों के बिना सरकार का सपना कैसे पूरा होगा.