शराब घोटालाः फरार विजय भाटिया गिरफ्तार
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में फरार आरोपी विजय भाटिया को एसीबी ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है. भाटिया को दिल्ली स्थिति उसके घर से पकड़ा गया है.
इसके साथ ही ईओडब्ल्यू की टीम ने भाटिया के दुर्ग-भिलाई स्थित 6 ठिकानों पर रविवार सुबह दबिश दी है. जहां छानबीन जारी है.
विजय भाटिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं.
विजय भाटिया के भिलाई नेहरू नगर स्थित घर पर आज सुबह करीब 6 बजे एसीबी और ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने दबिश दी. दो अलग-अलग गाड़ियों में 7 अधिकारी यहां पहुंचे. अधिकारियों द्वारा घर में मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है.
अधिकारियों ने घर के नौकरों को आज काम से छुट्टी देकर उनसे भी पूछताछ की है.
ज्ञात हो कि विजय भाटिया के ठिकानों पर इससे पहले भी ईडी, एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीमें तीन बार छापा मार चुकी हैं.
पिछले बार जब विजय भाटिया के घर पर छापा मारा गया तब वे नहीं मिले थे. तब से विजय भाटिया फरार चल रहा था. काफी लंबे समय बाद उसे गिरफ्तार किया गया है.
शराब घोटाला मामले को लेकर इससे पहले 20 मई को भी ईओडब्ल्यू की टीम ने छत्तीसगढ़ के 20 से 25 ठिकानों पर दबिश दी थी.
ईओडब्ल्यू की टीम ने रायपुर, धमतरी, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर समेत कई जिलों में एक साथ कार्रवाई की थी. उस समय भी कारोबारियों और आबकारी अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी.
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी जांच कर रही है. ईडी ने एसीबी में रिपोर्ट दर्ज कराई है.
दर्ज एफआईआर में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है. ईडी के चालान में इस मामले में अब तक 21 लोगों आरोपी बनाया गया है.
जिनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनवर ढेबर, अनिल टूटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, छत्तीसगढ़ डिस्टलर, वेलकम डिस्टलर, टॉप सिक्योरिटी, ओम साईं ब्रेवरेज, दिशिता वेंचर, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट, और सिद्धार्थ सिंघानिया जैसे प्रमुख नाम शामिल है.
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था.
वहीं एसीबी की जांच में पाया गया कि साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई. इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है.
पूर्व आबकारी मंत्री लखमा भी हैं जेल में
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी ने 28 दिसंबर 2024 को कवासी लखमा के आवास व अन्य ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए थे. जिनमें घोटाले से हुई कमाई के सबूत थे.
उसके बाद लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया. कवासी लखमा 16 जनवरी 2025 से जेल में हैं.
कवासी लखमा पर आरोप है कि वह शराब घोटाले में सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे. उन्हीं के निर्देश पर सिंडिकेट काम करता था. इनसे अलावा शराब नीति बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका थी.
ईडी का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया.
आरोप है कि शराब घोटाले में कमीशन के तौर पर लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे.
ईडी का कहना है कि 3 साल तक शराब घोटाला चला. तीन साल के 36 महीने में लखमा को कुल 72 करोड़ रुपए मिले.
त्रिपाठी-टुटेजा समेत चार को जमानत
छत्तीसगढ़ के दो हजार करोड़ से अधिक के शराब घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एपी त्रिपाठी समेत चार लोगों को जमानत दे दी थी.
अनुराग द्विवेदी और दीपक दुआरी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल व शशांक मिश्रा व अरुणपति त्रिपाठी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी माथुर ने पैरवी की थी.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एएस ओका की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि मामले में दर्ज किए गए निष्कर्षों पर विचार करने के बाद अपीलकर्ताओं को जमानत दी जानी चाहिए.
इससे जांच किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगी. उस समय भी जमानत देने के साथ कोर्ट ने कुछ शर्तें भी रखी थी. जिसका पालन आरोपियों को करना होगा.
शर्त के मुताबिक आरोपियों को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे. साथ ही रोज जांच अधिकारी के पास हाजिरी देने होगी.
वहीं अनवर ढेबर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. इसके बाद अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी.
इसके बाद भी वह जेल से बाहर नहीं आ पाए. क्योंकि कोर्ट ने ईडी के मामले में जमानत दी है, लेकिन इसी मामले में ईओडब्ल्यू में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है.