शराब घोटालाः लखमा की संपत्ति के साथ ही सुकमा कांग्रेस भवन अटैच
ईडी ने लखमा की संपत्ति के साथ ही सुकमा कांग्रेस भवन को अटैच किया है
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उसके बेटे हरीश लखमा की संपत्ति को अटैच कर दिया है. साथ ही सुकमा स्थित कांग्रेस भवन को भी अटैच किया है.
जानकारी के अनुसार शराब घोटाले मामले में कवासी लखमा के सुकमा स्थित मकान के अलावा रायपुर के बंगले को अटैच किया गया है. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 6 करोड़ रुपए है. इसमें बैंक खातों में जमा राशि भी शामिल है.
कहा जाता है कि ईडी की जांच में यह तथ्य सामने आया था कि हरीश लखमा ने शराब घोटाले से होने वाली आमदनी का निवेश अचल संपत्तियों में किया था. सुकमा में कांग्रेस कार्यालय भवन बनाने में भी काफी खर्च किया था.
ज्ञात हो कि 28 दिसंबर 2024 को ईडी ने कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश कवासी के अलावा उनके कुछ करीबियों के यहां एक साथ छापा मार कार्रवाई की थी.
ईडी की टीम ने सुकमा के साथ ही रायपुर के धरमपुरा स्थित कवासी लखमा के बंगले में दबिश दी थी.
कवासी लखमा के करीबी माने जाने वाले सुशील ओझा के राजधानी रायपुर स्थित चौबे कॉलोनी में उनके घर और बेटे हरीश लखमा के दोस्त सुकमा नगर पालिका अध्यक्ष राजू साहू के घर पर छापा मार जांच की थी.
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी जांच कर रही है. ईडी ने एसीबी में रिपोर्ट दर्ज कराई है.
दर्ज एफआईआर में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है. ईडी के चालान में इस मामले में अब तक 21 लोगों आरोपी बनाया गया है.
जिनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनवर ढेबर, अनिल टूटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, छत्तीसगढ़ डिस्टलर, वेलकम डिस्टलर, टॉप सिक्योरिटी, ओम साईं ब्रेवरेज, दिशिता वेंचर, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट और सिद्धार्थ सिंघानिया जैसे प्रमुख नाम शामिल है.
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था.
वहीं एसीबी की जांच में पाया गया कि साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई. इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है.
पूर्व आबकारी मंत्री लखमा हैं जेल में
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी ने 28 दिसंबर 2024 को कवासी लखमा के आवास व अन्य ठिकानों पर छापा मारकर महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए थे. जिनमें घोटाले से हुई कमाई के सबूत थे.
उसके बाद लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया. कवासी लखमा 16 जनवरी 2025 से जेल में हैं.
कवासी लखमा पर आरोप है कि वह शराब घोटाले में सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे. उन्हीं के निर्देश पर सिंडिकेट काम करता था. इनसे अलावा शराब नीति बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका थी.
ईडी का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया.
आरोप है कि शराब घोटाले में कमीशन के तौर पर लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे.
ईडी का कहना है कि 3 साल तक शराब घोटाला चला. तीन साल के 36 महीने में लखमा को कुल 72 करोड़ रुपए मिले.