शराब घोटालाः अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
शराब घोटाला मामले में अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन्हें जमानत दे दी है.
टुटेजा को एक साल से अधिक समय तक जेल में रहने के आधार पर जमानत मिली है. कोर्ट ने पासपोर्ट जमा कराने, सुनवाई के दौरान अदालत के साथ सहयोग करने सहित कुछ सख्त शर्ते रखी हैं.
हालांकि अनिल टुटेजा को ईडी के केस में राहत मिली है. लेकिन शराब घोटाले मामले में ईओडब्ल्यू ने भी केस दर्ज किया है. जिसमें अभी जांच चल रही है. ऐसे में जमानत मिलने के बाद भी वे जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे.
मंगलवार को जमानत याचिका की सुनवाई जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की बैंच में हुई.
कोर्ट ने जमानत देते कहा कि अपीलकर्ता ने लगभग एक साल की कैद काट ली है.
इस मामले में 20 से अधिक आरोपी हैं और 30 से अधिक लोगों की गवाहों का हवाला दिया गया है.
इसी तरह की स्थिति एक सह-आरोपी अरुणपति त्रिपाठी को जमानत दे दी है. इस आधार पर अनिल टुटेजा की जमानत मंजूर किया गया है.
हालांकि ईडी की ओर से वकील एसवी राजू ने जमानत का विरोध किया.
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 को विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें टुटेजा के खिलाफ आरोप तय किए गए थे.
हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोप तय करने से पहले सरकार से अनुमति नहीं ली गई थी.
जबकि कोई सरकारी अफसर अपने कार्य के दौरान किसी अपराध का आरोपी है, तो कोर्ट में मुकदमा चलाने के लिए पहले सरकार से मंजूरी लेना जरूरी होता है.
एपी त्रिपाठी समेत तीन को भी मिल चुकी है जमानत
छत्तीसगढ़ के दो हजार करोड़ से अधिक के शराब घोटाले मामले में पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने एपी त्रिपाठी समेत तीन को जमानत दे दी थी.
वहीं अनवर ढेबर और पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था.
अनुराग द्विवेदी और दीपक दुआरी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल व शशांक मिश्रा व अरुणपति त्रिपाठी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी माथुर ने पैरवी की थी.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एएस ओका की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि मामले में दर्ज किए गए निष्कर्षों पर विचार करने के बाद अपीलकर्ताओं को जमानत दी जानी चाहिए.
इससे जांच किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगी. उस समय भी जमानत देने के साथ कोर्ट ने कुछ शर्तें भी रखी थी. जिसका पालन आरोपियों को करना होगा.
शर्त के मुताबिक आरोपियों को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे. साथ ही रोज जांच अधिकारी के पास हाजिरी देनी होगी. क्या है छत्तसीगढ़ शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी जांच कर रही है. ईडी ने एसीबी में रिपोर्ट दर्ज कराई है.
दर्ज एफआईआर में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है.
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था. पूर्व आबकारी मंत्री लखमा भी हैं जेल में
इस मामले में राज्य सरकार के पूर्व मंत्री कवासी लखमा भी 16 जनवरी 2025 से जेल में हैं.
कवासी लखमा पर आरोप है कि वह शराब घोटाले में सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे. उन्हीं के निर्देश पर सिंडिकेट काम करता था. इनसे अलावा शराब नीति बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका थी.
ईडी का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया.
आरोप है कि शराब घोटाले में कमीशन के तौर पर लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे.
ईडी का कहना है कि 3 साल तक शराब घोटाला चला. तीन साल के 36 महीने में लखमा को कुल 72 करोड़ रुपए मिले.