SIR विवाद पर NDA में उठी स्पष्टीकरण की मांग
नई दिल्ली । डेस्क: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच अब सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. एनडीए में शामिल तीन प्रमुख सहयोगी दलों लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के शीर्ष नेताओं ने चुनाव आयोग से जनता के संशय दूर करने और इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने की अपील की है.
यह पूरा मामला निर्वाचन आयोग के तीन सदस्यों के बीच फैसलों को लेकर दर्ज मतभेदों की खबरों के बाद गहराया है. हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आयोग के भीतर सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से ही लिए गए थे.
चिराग पासवान: 'चुनावी प्रक्रिया से लोगों का भरोसा उठना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं'
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने विपक्ष के आरोपों का समर्थन करने से इनकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से उठे सवालों पर चुनाव आयोग को खुलकर बात करनी चाहिए. चिराग पासवान ने जोर देकर कहा कि यदि आम जनता का चुनावी व्यवस्था से विश्वास कम होता है, तो यह लोकतंत्र के भविष्य के लिए चिंताजनक है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग को राजनीतिक बयानबाजी या राहुल गांधी के बयानों का जवाब देने की जरूरत नहीं है, बल्कि देश की जनता के मन में उपजे संशय और भ्रम को मजबूती से दूर करने की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी कहा कि वे केवल सरकार में शामिल होने के कारण आयोग का बचाव नहीं कर रहे हैं, बल्कि लोकतंत्र में निष्पक्षता और विश्वास बनाए रखने के पक्षधर हैं.
टीडीपी सांसद देवरायालु: 'आंध्र प्रदेश में प्रक्रिया सफल, लेकिन स्पष्टीकरण से बढ़ेगा भरोसा'
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने आंध्र प्रदेश में आयोजित एसआईआर अभ्यास का समर्थन करते हुए इसे सफल बताया. उन्होंने कहा कि विपक्षी दल भी राज्य में हुई प्रक्रिया पर कोई गंभीर सवाल या कमी साबित नहीं कर पाए हैं.
इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए कहा कि जब भी इस प्रतिष्ठित संस्था पर सवाल उठते हैं, तो उचित स्पष्टीकरण देना और पारदर्शिता बनाए रखना आयोग के प्रति जनविश्वास को और मजबूत करता है.
उपेन्द्र कुशवाहा: 'एसआईआर से उपजे भ्रम को आयोग तुरंत दूर करे'
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि एसआईआर को लेकर जारी विवाद ने आम लोगों के बीच भारी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है.
उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग को बिना किसी देरी के मामले की वास्तविक स्थिति पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी को समाप्त किया जा सके.
आयोग के भीतर मतभेद की खबरें और चुनाव आयोग का पक्ष
विवाद की मुख्य वजह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी-के बीच प्रक्रियात्मक निर्णयों को लेकर दर्ज असहमतियों की रिपोर्ट बताई जा रही है. खबरों के मुताबिक, 10 महीनों में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया, फॉर्म-6 में संशोधन, मतदाता सूची में बदलाव और डेटाबेस के नियंत्रण जैसे लगभग 14 अहम विषयों पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी.
इन खबरों का खंडन करते हुए निर्वाचन आयोग ने बयान जारी कर कहा है कि किसी भी संस्थात्मक निर्णय प्रक्रिया में विचारों का आदान-प्रदान और सुझाव आना एक सामान्य और स्वस्थ प्रक्रिया है. आयोग के अनुसार, चुनाव आयुक्तों की टिप्पणियां और सुझाव चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने की कवायद का हिस्सा थे तथा पिछले एक वर्ष के दौरान एसआईआर सहित सभी अंतिम आदेश पूर्ण सर्वसम्मति से ही जारी किए गए हैं.
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने तथा जारी एसआईआर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग तेज कर दी है.