स्वतंत्रता से पहले जन्मे 7 देसी ब्रांड जो दिल में बस गये
नई दिल्ली । डेस्क: भारत की आजादी से पहले शुरू हुए कुछ ब्रांड आज भी हमारी यादों और जिंदगी का हिस्सा हैं. बोरोलिन, रूह अफजा, केवेंटर्स, पारले-जी, सिप्ला, गोदरेज और वडिलाल जैसे ब्रांड्स ने समय के साथ बदलते हुए भी अपनी जड़ों को मजबूत रखा है. आइए, इनके सफर पर एक नजर डालें:
बोरोलिन: 1929 में शुरू हुआ यह क्रीम स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक बना. हरे रंग की ट्यूब और हाथी के लोगो के साथ यह आज भी घावों का भरोसेमंद साथी है.
रूह अफजा: 1907 में पुरानी दिल्ली में शुरू हुआ यह शरबत गर्मियों की राहत और रमजान की रौनक है. इसके गुलाबी स्वाद ने देश-विदेश में जगह बनाई.
केवेंटर्स: 1889 में शुरू हुआ यह डेयरी ब्रांड 2014 में मिल्कशेक चेन के रूप में फिर से उभरा. पुरानी यादों को आधुनिक अंदाज में पेश करता है.
पारले-जी: 1930 के दशक से चाय के साथ हर घर में मौजूद यह बिस्किट अपनी सस्ती कीमत और स्वाद के लिए मशहूर है.
सिप्ला: 1935 में स्थापित, यह फार्मा कंपनी सस्ती दवाओं के लिए जानी जाती है. एचआईवी दवाओं ने इसे वैश्विक पहचान दी.
गोदरेज: 1897 में ताले और साबुन से शुरू हुआ गोदरेज आज फर्नीचर, उपकरणों और रियल एस्टेट में भरोसे का नाम है.
वडिलाल: 1907 में अहमदाबाद में शुरू हुआ यह आइसक्रीम ब्रांड आज भी केसर-पिस्ता जैसे पारंपरिक स्वादों के साथ नए प्रयोग करता है.
इन ब्रांड्स ने न सिर्फ समय की कसौटी पर खुद को साबित किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और यादों में भी गहरी छाप छोड़ी है.