रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

ट्रेनिंग में दिव्यांग हुए कैडेटों को 'पूर्व सैनिक' का दर्जा क्यों नहीं? SC का सवाल

C

CG Khabar

03 अप्रै. 2026, 01:16 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने सैन्य प्रशिक्षण के दौरान चोट या दिव्यांगता के कारण बाहर (बोर्ड-आउट) होने वाले कैडेटों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार से एक महत्वपूर्ण सवाल किया है. जस्टिस बी.वी. नागरथना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने केंद्र से पूछा है कि क्या ऐसे कैडेटों को 'पूर्व सैनिक' का दर्जा दिया जा सकता है, ताकि वे सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में मिलने वाले आरक्षण का लाभ उठा सकें.


अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रेनिंग के दौरान दिव्यांग होने वाले अधिकतर कैडेट 20 से 30 वर्ष की आयु के होते हैं और उन्हें जीवनयापन के लिए रोजगार की सख्त आवश्यकता होती है. 

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र को निर्देश दिया कि वह 'पूर्व सैनिक' की परिभाषा का दायरा बढ़ाने पर विचार करे ताकि इसमें इन कैडेटों को भी शामिल किया जा सके.


सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने सरकार की ओर से व्यापक जवाब देने का आश्वासन दिया है. 


इससे पहले, कोर्ट ने कैडेटों के लिए बीमा कवर, रक्षा सेवाओं में डेस्क जॉब के जरिए पुनर्वास और वर्तमान में मिलने वाली 40,000 रुपये की मामूली एकमुश्त राशि को बढ़ाने का भी सुझाव दिया था. 


कोर्ट को सूचित किया गया कि रक्षा मंत्रालय ने इन कैडेटों को ईसीएचएस (ECHS) स्वास्थ्य सुविधा देने की फाइल को मंजूरी दे दी है, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है. रिपोर्टों के अनुसार, 1985 से अब तक लगभग 500 कैडेट प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग होकर बाहर हुए हैं, जो वर्तमान में गंभीर आर्थिक और चिकित्सा संकट का सामना कर रहे हैं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP