निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर भूपेश बघेल को राहत नहीं
नई दिल्ली । संवाददाता: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनके भतीजे विजय बघेल ने राज्य के 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान मानदंडों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चुनाव याचिका दायर की थी.
जस्टिस सूर्या कांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट-कम-चुनाव ट्रिब्यूनल में याचिका की पोषणीयता को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में उठाने की छूट दी.
पीठ ने कहा, "यदि ऐसी कोई अर्जी दाखिल की जाती है, तो हाईकोर्ट से अनुरोध है कि वह दूसरी पक्ष को सुनने का अवसर देने के बाद और मामले की मेरिट पर आगे बढ़ने से पहले इसका फैसला करे. हाईकोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणियों का प्रस्तावित अर्जी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा."
भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा उनकी उस अर्जी को खारिज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उन्होंने विजय बघेल की चुनाव याचिका को खारिज करने के लिये आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन दिया था.
वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा और अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी ने भूपेश बघेल की ओर से तर्क दिया कि मौन अवधि नियमों का उल्लंघन "भ्रष्ट आचरण" की श्रेणी में नहीं आता, और इसलिये यह चुनाव याचिका पोषणीय नहीं है.
पीठ ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को हाईकोर्ट-कम-चुनाव ट्रिब्यूनल के समक्ष उठाया जाये.
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता भूपेश बघेल और भाजपा नेता विजय बघेल ने 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन विधानसभा क्षेत्र से एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था. मतगणना के बाद भूपेश बघेल को विधायक घोषित किया गया.
चुनाव के बाद, विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक चुनाव याचिका दायर की, जिसमें भ्रष्ट आचरण और मतदान समाप्त होने से पहले की 48 घंटे की मौन अवधि (आरपी एक्ट की धारा 126) के उल्लंघन का आरोप लगाया था.
दावा किया गया कि इस अवधि के दौरान भूपेश बघेल ने एक रैली/रोड शो आयोजित किया और उनके पक्ष में नारे लगाये. कथित तौर पर इस रैली/रोड शो को विजय बघेल के चुनाव एजेंट ने मोबाइल फोन पर वीडियोग्राफ और फोटोग्राफ किया था.
भूपेश बघेल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह अस्पष्ट है और इसमें कोई मुकदमे योग्य कारण नहीं है. जब हाईकोर्ट ने उनकी आदेश 7 नियम 11 की अर्जी को खारिज कर दिया, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.