ग्रामीण साक्षरता में छत्तीसगढ़ देश में 27वें नंबर पर
छत्तीसगढ़ देश की साक्षरता दर से कम छत्तीसगढ़ की साक्षरता दर
रायपुर | डेस्कः ग्रामीण साक्षरता के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य देश में 27वें नंबर पर आता है. छत्तीसगढ़ की साक्षरता दर 76.6 फीसदी है, जो कि राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता दर 77.5 फीसदी से भी कम है.
केन्द्र सरकार ने लोकसभा में पूछे गये सवाल के जबाव में देश की साक्षरता दर के साथ ही राज्यवार ब्यौरा जारी किया है.
साल 2023-24 की ग्रामीण साक्षरता रिपोर्ट के अनुसार देश के सभी 36 राज्यों में केन्द्र शासित प्रदेशों सहित लक्षद्वीप 99.5 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ पहले स्थान पर है, जबकि छत्तीसगढ़ इस मामले में फिसड्डी राज्यों की श्रेणी में आता है.
छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां की सर्वाधिक आबादी गांव देहात में रहती है. किसी राज्य के विकास के लिए उस राज्य के निवासियों का साक्षर होना बहुत जरूरी है, लेकिन छत्तीसगढ़ के ग्रमीण इलाकों में रहने वाले 24.4 फीसदी निरक्षर हैं.
वयस्कों के बीच ग्रामीण साक्षरता दर के तहत साक्षरता दर में सुधार करने के लिए भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 2022 से 2027 तक नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (एनआईएलपी) नामक एक केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की है.
जिसे उल्लास: समाज में सभी के लिये आजीवन शिक्षा की समझ के रूप में जाना जाता है. एनईपी 2020 के अनुरूप यह योजना 15 वर्ष से अधिक आयु के उन वयस्कों के लिए है, जो स्कूल नहीं जा पाते, को केन्द्र में रखती है.
इस योजना में आधारभूत साक्षरता और संख्याज्ञान, महत्वपूर्ण जीवन कौशल, मूलभूत शिक्षा, व्यावसायिक कौशल और सतत शिक्षा सहित पांच प्रमुख घटक शामिल किये गये हैं.
रायपुर की बात करें तो यहां 2,415 स्कूल संचालित हैं. इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 5,39,907 है, जिनमें से लड़कियों की संख्या 2,68,008 (49.63%) है.
इन स्कूलों में शिक्षकों की कुल संख्या 23,756 है. स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर उच्च प्राथमिक विद्यालय में 2.1 और माध्यमिक विद्यालय में 14.5 है.
लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर क्रमशः 0, 0.9 और 10.2 प्रतिशत है.
राज्य की राजधानी में 100 में से लगभग 15 बच्चे माध्यमिक स्कूल पहुंचते-पहुंचते पढ़ाई छोड़ देते हैं और उच्च शिक्षा में यह आंकड़ा और बढ़ जाता है.
अभी हाल ही में प्रकाशित असर की रिपोर्ट में भी ग्रमीण शिक्षा की हालत बहुत खराब दिखाई गयी थी. जिसमें कक्षा तीसरी व आठवीं के कई विद्यार्थी कक्षा दूसरी की हिंदी की किताब नहीं पढ़ पा रहे थे.
गणित में तो और ज्यादा बुरा हाल है.