केरल में सत्तारूढ़ LDF में निचले स्तर पर दरार?
तिरुअनंतपुरम । डेस्क: केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के दूसरे सबसे बड़े घटक, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने अपनी हालिया जिला सम्मेलनों में राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. CPI के पट्टनमथिट्टा जिला सम्मेलन में पारित राजनीतिक रिपोर्ट में LDF सरकार पर कट्टर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोडी सुनी जैसे दोषियों के लिए जेलें "विश्राम केंद्र" बन गई हैं. इसके अलावा, केरल असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम (KAAPA) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत आरोपी व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने का दावा किया गया है.
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जैसे ADGP अजिथ कुमार, मंत्रियों के प्रति सम्मान तक नहीं दिखाते.
CPI की रिपोर्ट ने कुडुंबश्री सदस्यों को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त करने की प्रथा की भी आलोचना की, जिसके कारण केरल लोक सेवा आयोग (PSC) और रोजगार कार्यालय को "मात्र डरावने पुतले" की तरह कम कर दिया गया है. पशुपालन विभाग के कामकाज को भी असंतोषजनक बताया गया है.
इस सप्ताह की शुरुआत में, कोट्टायम जिला सम्मेलन में CPI नेताओं और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा.
प्रतिनिधियों ने नेतृत्व पर दृढ़ रुख न अपनाने और प्रभावी नेतृत्व की कमी का आरोप लगाया. जिला सचिव एडवोकेट वीबी बिनु द्वारा प्रस्तुत 106 पेज की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान, प्रतिनिधियों ने कहा कि न तो मुख्यमंत्री और न ही CPI(M) CPI को गंभीरता से लेते हैं.
कुछ ने मुख्यमंत्री के कामकाज की शैली को तानाशाही करार देते हुए कहा कि वे अपने मंत्रिमंडल के एक भी मंत्री से सलाह नहीं लेते.
प्रतिनिधियों ने यह भी उल्लेख किया कि लोकसभा चुनाव परिणामों में जनता की नाराजगी स्पष्ट रूप से झलकती है, लेकिन सरकार अभी भी सुधार करने को तैयार नहीं है.