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हीरोइनों को भी समान मानदेय मिलना चाहिए-सुधीर मिश्रा

हीरोइनों को भी समान वेतन मिलना चाहिए- फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा

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23 अक्टू. 2025, 08:34 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

शुधीर मिश्रा
शुधीर मिश्रा

मुंबई । मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड में नायक-नायिकाओं के बीच समान पारिश्रमिक को लेकर चल रही बहस के बीच, प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा ने इस विषय पर अपना विचार खुलकर व्यक्त किया है. उनका मानना ​​है कि अगर किसी अभिनेत्री का किरदार उनके पुरुष सह-कलाकार जितना ही महत्वपूर्ण है और दोनों की स्टार पावर समान है, तो उन्हें भी समान वेतन मिलना चाहिए.


एक साक्षात्कार में, वयोवृद्ध निर्देशक ने कहा, "समानता का मतलब यह है कि अगर महिला का किरदार पुरुष के किरदार के समान महत्व का है, तो उसे समान पारिश्रमिक दिया जाना चाहिए. अगर उसका किरदार और भी बड़ा है, तो उसे और भी अधिक वेतन मिलना चाहिए. हालांकि, यह सब काफी हद तक बॉक्स ऑफिस से जुड़ा हुआ है. फिल्मों में आपको सामान्य वेतन नहीं मिलता, बल्कि मुनाफे का हिस्सा मिलता है."


उन्होंने समझाया कि फिल्मों में किसी स्टार को अधिक वेतन इसलिए मिलता है क्योंकि वह अधिक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दिलाता है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कभी-कभी कुछ सितारों को उनकी आय से भी अधिक वेतन मिलता है, जो एक अलग मामला है.


उदाहरण के तौर पर उन्होंने दीपिका पादुकोण का नाम लिया और कहा कि उनकी लोकप्रियता और स्टार पावर उनके अधिकांश पुरुष सह-कलाकारों के बराबर है. सुधीर मिश्रा ने शाहरुख खान को इस चर्चा से अलग रखते हुए कहा कि "वह कभी बूढ़े नहीं होते और हमेशा दर्शकों के मन में नई ऊर्जा जगाते हैं." उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि दीपिका संजय लीला भंसाली की कई फिल्मों में मुख्य किरदार थीं, "इसलिए अब समय आ गया है" कि उन्हें उनके पुरुष सह-कलाकारों के बराबर वेतन मिले.


दीपिका पादुकोण ने संजय लीला भंसाली की सफल फिल्में, 'गोलियों की रासलीला: राम-लीला' (2013), 'बाजीराव मस्तानी' (2015), और 'पद्मावत' (2018) में मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं. खबरें थीं कि 'पद्मावत' में दीपिका को शाहिद कपूर और रणवीर सिंह से ज़्यादा पारिश्रमिक मिला था. सुधीर मिश्रा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दीपिका के 'कल्कि 2' और 'स्पिरिट' प्रोजेक्ट से बाहर होने की खबरों ने विवाद खड़ा कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, दीपिका के इन फिल्मों से हटने के मुख्य कारणों में से एक पारिश्रमिक में असमानता थी.


मिश्रा ने अपनी निर्देशित फिल्म 'चमेली' का भी जिक्र किया और कहा कि उसमें करीना कपूर को उनके पुरुष सह-कलाकार राहुल बोस से ज़्यादा वेतन मिलना चाहिए था. उन्होंने कहा, "...निश्चित रूप से उनके किरदार के हिसाब से उन्हें ज्यादा वेतन मिलना चाहिए था."


सुधीर मिश्रा के इस बयान से यह स्पष्ट है कि बॉलीवुड में पारिश्रमिक समानता अब केवल अभिनेत्रियों की मांग नहीं है, बल्कि यह फिल्म उद्योग का एक महत्वपूर्ण प्रश्न बन गया है. यह चर्चा नायिकाओं के काम और सम्मान के साथ-साथ उनके वित्तीय मूल्यांकन को भी समान रूप से महत्व देगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP