HC ने बंगाल के मजदूरों की याचिका पर सरकार से जवाब मांगा
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 12 बंगाल के प्रवासी मजदूरों की याचिका पर नोटिस जारी किया है. जिसमें उन्होंने अवैध आपराधिक कार्यवाही रद्द करने और अवैध हिरासत व जेल में बंद करने के लिए मुआवजे की मांग की है.
इन मजदूरों पर बांग्लादेशी घुसपैठिए होने का आरोप लगाया गया था. याचिकाकर्ताओं को पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि करने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद जेल से रिहा किया गया था.
महमूद शेख और 11 अन्य, जो पश्चिम बंगाल के कृष्णा नगर और मुर्शिदाबाद के निवासी हैं, ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उनकी पहचान छिपाने की कोई कोशिश नहीं की गई थी. वे 30 जून से कोण्डागांव में एक स्कूल निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे और वहां उचित सत्यापन के साथ रह रहे थे. पुलिस की मांग पर उन्होंने अपने आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए थे.
याचिका के अनुसार, 12 जुलाई को कोण्डागांव पुलिस ने बिना किसी संज्ञेय अपराध के इन मजदूरों को हिरासत में लिया, उनके साथ बेरहमी से व्यवहार किया और बाद में उन्हें जगदलपुर की सेंट्रल जेल में भेज दिया गया.
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उन्हें दो दिन तक जेल में रखा गया, लेकिन न तो किसी मजिस्ट्रेट या अदालत के समक्ष पेश किया गया और न ही कोई हिरासत आदेश दिया गया.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया.
इसके बाद याचिकाकर्ताओं को जवाब देने के लिए समय दिया जाएगा.
अधिवक्ता सुदिप श्रीवास्तव और रजनी सोरेन ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, लेकिन सुनवाई से पहले ही 14 जुलाई को कोण्डागांव के एसडीएम के आदेश पर सभी 12 मजदूरों को रिहा कर दिया गया.
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, कोण्डागांव पुलिस ने उन्हें धमकाया और छत्तीसगढ़ छोड़ने के लिए मजबूर किया, जिसके कारण उनकी आजीविका छिन गई और उन्हें अपने गृह राज्य लौटना पड़ा.