'बाल मित्र': दंतेवाड़ा बनेगा स्कूल ड्रॉपआउट-मुक्त जिला
दंतेवाड़ा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए एक नवाचारी अभियान 'बाल मित्र' शुरू किया है. यह अभियान मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहे छत्तीसगढ़ के प्रयासों का हिस्सा है. इसका मुख्य उद्देश्य स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है.
दंतेवाड़ा के कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि इस अभियान के तहत गांवों में शिक्षा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां बच्चों को बुनियादी साक्षरता और गणितीय कौशल सिखाए जाते हैं. उन्होंने कहा, "हम कहानियों, कविताओं और बच्चों के लिए अनुकूल माहौल के माध्यम से उपयुक्त शिक्षण स्थान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं. इसके अलावा, बच्चों को खेल और अन्य सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है."
पिछले साल इस अभियान को 65 पंचायतों में लागू किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप कई बच्चे शिक्षा व्यवस्था से जुड़ सके. बाल मित्र स्वयंसेवक, जो कॉलेज पूरा कर चुके या वर्तमान में पढ़ाई कर रहे युवा हैं, बच्चों के लिए दो घंटे के सत्र आयोजित करते हैं. इन सत्रों का उद्देश्य स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के बुनियादी साक्षरता और गणितीय कौशल को बेहतर करना है.
कलेक्टर ने आगे बताया कि यह कार्यक्रम पूरे जिले में चलाया जा रहा है. बाल मित्र स्वयंसेवकों को 6,000 रुपये का मासिक वजीफा दिया जाता है और उन्हें प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है, जिससे उनके नेतृत्व, संवाद और संचार कौशल में सुधार होता है. यह प्रशिक्षण स्वयंसेवकों के भविष्य में करियर विकास में भी सहायक सिद्ध होगा.
अभियान का अंतिम लक्ष्य दंतेवाड़ा को ड्रॉपआउट-मुक्त जिला बनाना और 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को स्कूल शिक्षा से जोड़ना है. साथ ही, उनकी बुनियादी और गणितीय कौशलों को राज्य और राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाना है.