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HC: ट्रेन में चेन खींचना अपराध नहीं, रेलवे कर्मचारी को मिली राहत

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19 सित. 2025, 09:38 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

हाईकोर्ट
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बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि ट्रेन में चेन खींचना अपने आप में कोई अपराध या दुराचार नहीं है, जब तक कि यह साबित न हो कि इसे बिना उचित और पर्याप्त कारण के किया गया. यह फैसला साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (एसईसी) के कर्मचारी ऑस्टिन हाइड को बड़ी राहत देता है, जिन्हें 2010 में ट्रेन की चेन खींचने के आरोप में विभागीय कार्रवाई के तहत दो वेतन स्तरों की कटौती और पदावनति की सजा दी गई थी.


घटना 15 जुलाई 2010 की है, जब कोरबा-यशवंतपुर एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 2252) बिलासपुर रेलवे स्टेशन से रवाना हुई थी. उस समय टीटीई के पद पर कार्यरत ऑस्टिन हाइड, जो उस समय एक यात्री के रूप में यात्रा कर रहे थे, पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने परिवार और सामान को ट्रेन में चढ़ाने के लिए दो बार चेन खींची. विभागीय जांच में दो आरपीएफ कर्मियों ने गवाही दी कि हाइड ने चेन खींची थी, क्योंकि उनका परिवार समय पर स्टेशन पर नहीं पहुंचा था.

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2012 में, अनुशासनात्मक प्राधिकरण ने हाइड को दोषी ठहराया और उन्हें दो वेतन स्तरों की कटौती और दो साल की पदावनति की सजा सुनाई. यह सजा 2013 में अपील और 2014 में पुनरीक्षण में भी बरकरार रही. हाइड ने इस फैसले को जबलपुर के केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी) में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उनकी याचिका खारिज हो गई.


हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल शामिल थे, ने कहा कि चार्जशीट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि हाइड ने बिना उचित कारण के चेन खींची. रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 141 भी स्पष्ट करती है कि बिना पर्याप्त कारण के चेन खींचना ही अपराध है. 


कोर्ट ने पाया कि गवाहों ने केवल चेन खींचने की बात कही, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि परिवार ट्रेन में चढ़ा या यह कार्य अनुचित कारण से किया गया. इस तरह, चार्जशीट अस्पष्ट थी और कर्मचारी को अपना बचाव करने का उचित अवसर नहीं मिला.


कोर्ट ने अनुशासनात्मक प्राधिकरण, अपीलीय प्राधिकरण, पुनरीक्षण प्राधिकरण और सीएटी के सभी आदेशों (2012, 2013, 2014 और 2023) को रद्द कर दिया और हाइड पर लगाई गई सजा को निरस्त कर दिया. 


कोर्ट ने कहा कि विभागीय अधिकारियों को यह साबित करना होगा कि कर्मचारी ने बिना उचित कारण के चेन खींची, तभी इसे दुराचार माना जा सकता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP