73 वर्षीय सिख दादी की कैलिफोर्निया में हिरासत से हंगामा
सैन फ्रांसिस्को । डेस्क: कैलिफोर्निया में 73 वर्षीय सिख महिला हरजीत कौर की हिरासत ने सिख समुदाय और उससे परे लोगों में आक्रोश और दुख की लहर पैदा कर दी है. अमेरिका में अवैध आप्रवासियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच, तीन दशकों से अधिक समय से कैलिफोर्निया में रह रही हरजीत कौर को 8 सितंबर को यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट अधिकारियों ने नियमित चेक-इन के दौरान हिरासत में लिया.
हरजीत कौर ने कई बार अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका अंतिम आवेदन 2012 में खारिज हो गया था.
उनकी हिरासत ने कैलिफोर्निया और अन्य क्षेत्रों में सिख समुदाय में व्यापक सहानुभूति और दुख पैदा किया है. उनकी हिरासत के बाद, पिछले शुक्रवार को एल सोब्रांटे में करीब 200 लोग उनकी रिहाई की मांग के लिए एकत्र हुए, जिनके हाथों में "हमारी दादी को हाथ मत लगाओ" और "वह कोई अपराधी नहीं है" जैसे नारे लिखे तख्तियां थीं.
कौर, जो दो बच्चों की मां और पांच बच्चों की दादी हैं, 1992 से संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रही हैं.
उनके वकील दीपक अहलूवालिया ने जोर देकर कहा कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. 2007 में उनके शरण आवेदन के खारिज होने के बाद, उन्होंने 9वें यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स में अपील की थी. उनके अंतिम निष्कासन आदेश के कारण, उन्हें हर छह महीने में यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट के साथ नियमित चेक-इन करने का निर्देश दिया गया था, जिसके तहत उन्हें अस्थायी रूप से काम करने की कानूनी अनुमति दी गई थी. इसके बावजूद, 8 सितंबर को सैन फ्रांसिस्को यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट सुविधा में उन्हें हिरासत में ले लिया गया.
उनके वकील के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद कौर को फ्रेस्नो में एक कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया और बाद में हथकड़ी लगाकर बेकर्सफील्ड के एक हिरासत केंद्र में ले जाया गया, जहां वह अगले दिन सुबह 3 बजे पहुंचीं.
अहलूवालिया ने यह भी आरोप लगाया कि फ्रेस्नो में उनकी संक्षिप्त हिरासत के दौरान, कौर को एक ऐसी कोठरी में रखा गया था जिसमें न तो बिस्तर था और न ही कुर्सी, केवल एक शौचालय था जिसमें टॉयलेट पेपर भी नहीं था. जब उन्होंने पानी मांगा, तो अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें पानी नहीं दिया जा सकता.
कौर की हिरासत ने न केवल सिख समुदाय बल्कि व्यापक जनता में भी आक्रोश पैदा किया है. उनके समर्थन में चल रहे प्रदर्शनों ने अमेरिका की आप्रवासन नीतियों पर सवाल उठाए हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से देश में रह रहे हैं और समाज में योगदान दे रहे हैं.