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WTO ने US की 'क्लीन एनर्जी सब्सिडी' को बताया गलत

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31 जन. 2026, 07:28 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

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बीजिंग । डेस्क: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के एक पैनल ने अमेरिका के 'मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम' (Inflation Reduction Act) के तहत दी जाने वाली स्वच्छ ऊर्जा सब्सिडी के खिलाफ फैसला सुनाया है. चीन द्वारा दायर इस विवाद मामले में पैनल ने अमेरिकी सब्सिडी उपायों को WTO के अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के असंगत माना है और अमेरिका को इन सब्सिडी को वापस लेने का निर्देश दिया है.


चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने इस फैसले को "निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ" बताते हुए इसका स्वागत किया है. 


मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि चीन हमेशा से अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था और WTO नियमों का दृढ़ समर्थक रहा है. 


चीन ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका इस फैसले का सम्मान करेगा, अपनी गलतियों में सुधार करेगा और वैश्विक व्यापार के स्थिर विकास में योगदान देने के लिए त्वरित कार्रवाई करेगा.


गौरतलब है कि अमेरिका की 'क्लीन एनर्जी सब्सिडी' मुख्य रूप से इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट (IRA) 2022 का हिस्सा है, जिसे जलवायु परिवर्तन से निपटने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया गया था. इस नीति के तहत अमेरिकी सरकार ने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) जैसे हरित क्षेत्रों के लिए लगभग 369 अरब डॉलर आवंटित किए हैं. 


इसका मुख्य आकर्षण उपभोक्ताओं को नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर मिलने वाली $7,500 तक की टैक्स छूट और कंपनियों को घरेलू स्तर पर बैटरी एवं क्लीन-टेक उत्पादन के लिए दी जाने वाली भारी वित्तीय सहायता है.


हालांकि, यह नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का विषय बन गई क्योंकि इसमें 'लोकल कंटेंट' की कड़ी शर्तें जोड़ी गई हैं. इसका मतलब है कि सब्सिडी का पूरा लाभ केवल उन्हीं उत्पादों को मिलता है जिनका निर्माण या असेंबली मुख्य रूप से अमेरिका या उसके सहयोगी देशों में हुई हो. 


चीन और अन्य व्यापारिक भागीदारों का तर्क है कि यह शर्त विदेशी निर्माताओं के साथ भेदभाव करती है और मुक्त व्यापार के वैश्विक सिद्धांतों का उल्लंघन करती है, जिसके कारण हाल ही में WTO ने इसे नियमों के विरुद्ध करार दिया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP