क्या ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा?
नई दिल्ली । डेस्क: 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा आज, शुक्रवार, 10 अक्टूबर, को ओस्लो में होने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को "शांति राष्ट्रपति" (Peace President) बताते हुए इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए पुरजोर पैरवी कर रहे हैं, खासकर गाजा, इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम प्रयासों में अपनी कथित भूमिका को लेकर.
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नोबेल समिति के इस फैसले से नॉर्वे पर संभावित कूटनीतिक दबाव की आशंका भी बनी हुई है. ट्रंप प्रशासन और उनके समर्थक लगातार इस पुरस्कार के लिए लॉबिंग कर रहे हैं. नॉर्वे, जिसके अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक और आर्थिक संबंध हैं, इस स्थिति को लेकर सावधानी बरत रहा है. हालांकि, नॉर्वेजियन नोबेल समिति के प्रमुख जोरगेन वाटने फ्राइडनेस (Jorgen Watne Frydnes) ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका निर्णय 6 अक्टूबर को ही अंतिम रूप ले चुका है, और मध्य-पूर्व शांति समझौते को अगले साल के पुरस्कार के लिए ही माना जा सकता है. नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईदे (Espen Barth Eide) ने भी साफ किया है कि सरकार की चयन प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं है.
चयन प्रक्रिया और प्रमुख दावेदार
नोबेल शांति पुरस्कार के लिए इस साल 338 उम्मीदवार, 244 व्यक्ति और 94 संगठन नामांकित किए गए हैं. 1901 में अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के तहत स्थापित, यह पुरस्कार शांति और अंतर्राष्ट्रीय भाईचारे में महत्वपूर्ण योगदान देने वालों को दिया जाता है. पांच सदस्यीय नॉर्वेजियन नोबेल समिति गोपनीय तरीके से विजेताओं का चयन करती है.
ट्रंप के नामांकन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मैनेट और अमेरिकी सांसद बडी कार्टर सहित कई वैश्विक हस्तियों से आए हैं. हालांकि, नोबेल समिति प्रचार अभियानों को अनुचित लॉबिंग मानती है.
विशेषज्ञों को संदेह है कि ट्रंप इस साल जीत पाएंगे. उनके मुताबिक, नोबेल समिति आमतौर पर लंबे समय तक चलने वाले सहयोग और स्थिरता को पुरस्कृत करती है, न कि अल्पकालिक संघर्ष प्रबंधन को. स्वीडिश शांति विद्वान पीटर वॉलेनस्टीन ने कहा कि ट्रंप की पहलों के मूल्यांकन में समय लगेगा.
इस साल के प्रमुख दावेदारों में सूडान के इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स (Emergency Response Rooms), संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ जैसे UNRWA और UNHCR, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court), और यूलिया नवलनाया (मानवाधिकार अधिवक्ता) शामिल हैं. इसके अलावा, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स जैसे संगठन भी दौड़ में हैं.
क्या भविष्य में जीत सकते हैं ट्रंप?
विश्लेषकों का मानना है कि भले ही ट्रंप 2025 में यह पुरस्कार न जीत पाएं, लेकिन यदि गाजा या यूक्रेन में उनके राजनयिक प्रयासों से स्थायी शांति स्थापित होती है, तो अगले साल उनके नाम पर फिर से विचार किया जा सकता है.
नोबेल शांति पुरस्कार 2025 के विजेता का ऐलान आज भारतीय समयानुसार दोपहर 2:30 बजे किया जाएगा.