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क्या अमेरिका और ईरान के बीच खत्म होगा युद्ध? जानें दोनों देशों की शर्तें

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26 मार्च 2026, 01:54 AM 5 मिनट में पढ़ें 1

ईरान युद्ध
ईरान युद्ध

वॉशिंगटन/तेहरान । डेस्क: मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक '15-सूत्रीय शांति योजना' जारी की है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस शांति प्रस्ताव को पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुँचाया गया है. 


गौरतलब है कि पाकिस्तान ने इसी सप्ताह शांति वार्ता की मेजबानी करने की इच्छा जताई थी. जहाँ एक ओर राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि इस सप्ताह वाशिंगटन और तेहरान के बीच "बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत" हुई है, वहीं ईरान ने आधिकारिक तौर पर किसी भी बातचीत से इनकार करते हुए इसे अमेरिका का "खुद से संवाद" करार दिया है.


यह युद्ध, जिसे अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को शुरू किया था, वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानव जीवन के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हुआ है. ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल ईरान में ही 1,500 लोग मारे जा चुके हैं और 18,500 से अधिक घायल हुए हैं. युद्ध के कारण वैश्विक शेयर बाजार धराशायी हो गए हैं और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं.


अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव की प्रमुख शर्तें:


इजरायली मीडिया और अन्य सूत्रों के हवाले से जो 15-सूत्रीय योजना सामने आई है, उसमें अमेरिका ने ईरान के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं, जिनके बदले में कुछ रियायतें देने का वादा किया गया है:


* 30 दिनों का युद्धविराम: बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने हेतु तत्काल एक महीने के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव.


* परमाणु केंद्रों का खात्मा: नतांज, इस्फहान और फोर्डो में स्थित ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों को पूरी तरह से नष्ट करना.


* परमाणु हथियारों पर स्थायी रोक: ईरान को भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने की लिखित और स्थायी प्रतिबद्धता देनी होगी.


* यूरेनियम का हस्तांतरण: ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम का पूरा स्टॉक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना होगा और भविष्य में देश के भीतर यूरेनियम संवर्धन बंद करना होगा.


* निगरानी और निरीक्षण: IAEA को ईरान के शेष सभी परमाणु बुनियादी ढांचे की निगरानी करने की पूर्ण अनुमति देनी होगी.


* मिसाइल कार्यक्रम पर अंकुश: ईरान की मिसाइलों की मारक क्षमता और उनकी कुल संख्या पर सख्त सीमाएं लागू करना.


* क्षेत्रीय प्रॉक्सी पर रोक: मध्य पूर्व में सक्रिय विभिन्न सशस्त्र समूहों (प्रॉक्सी) को ईरान द्वारा दिए जाने वाले समर्थन को पूरी तरह समाप्त करना.


* ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले बंद करना: खाड़ी क्षेत्र में तेल और ऊर्जा केंद्रों पर होने वाले ईरानी हमलों को रोकना.


* हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना: वैश्विक शिपिंग के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी बाधा के फिर से खोलना.


* प्रतिबंधों की समाप्ति: यदि शर्तें मानी जाती हैं, तो अमेरिका ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटा देगा और उन तंत्रों को भी खत्म कर देगा जिनसे प्रतिबंध दोबारा लगाए जा सकते हैं.


* नागरिक परमाणु सहायता: अमेरिका ईरान के बुशहर नागरिक परमाणु संयंत्र में बिजली उत्पादन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगा.


ईरान की जवाबी शर्तें और कड़ा रुख:


ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और सैन्य नेतृत्व (IRGC) ने स्पष्ट किया है कि वे झुकने को तैयार नहीं हैं. ईरान की ओर से शांति के लिए निम्नलिखित शर्तें रखी गई हैं:


* कानूनी अधिकारों की मान्यता: ईरान के 'वैध अधिकारों' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए.


* युद्ध क्षतिपूर्ति का भुगतान: युद्ध के कारण हुए जान-माल के नुकसान के लिए अमेरिका और इजरायल द्वारा मुआवजे का भुगतान किया जाए.


* भविष्य की सुरक्षा गारंटी: अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह गारंटी दे कि भविष्य में ईरान पर दोबारा कोई हमला नहीं होगा.


* अमेरिकी सैन्य ठिकानों की विदाई: ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान चाहता है कि मध्य पूर्व क्षेत्र से सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद किया जाए.


* हॉर्मुज पर नियंत्रण: ईरान जलमार्गों के पारगमन को नियंत्रित करने के लिए एक नया कानूनी तंत्र चाहता है, जो इस क्षेत्र में उसके प्रभुत्व को औपचारिक रूप दे.


* सभी प्रतिबंधों का खात्मा: ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक उस पर लगे भारी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटते, कोई स्थायी समझौता संभव नहीं है.


युद्ध का बदलता स्वरूप और कूटनीतिक चुनौतियां:


जानकारों का मानना है कि पिछले साल जून 2025 में हुए 12 दिवसीय युद्ध की तुलना में इस बार अमेरिका का लक्ष्य बदला हुआ नजर आ रहा है. पिछले साल लक्ष्य केवल परमाणु ठिकानों तक सीमित था, लेकिन इस बार 'सत्ता परिवर्तन' की कोशिशें भी देखी गईं. 


28 फरवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया नेता चुना गया, जिससे अमेरिका नाखुश दिखा. हालांकि, ताजा 15-सूत्रीय योजना में सत्ता परिवर्तन का कोई सीधा जिक्र नहीं है, जो यह संकेत देता है कि ट्रम्प प्रशासन अब युद्ध को लंबा खींचने के बजाय समझौता करने की दिशा में बढ़ रहा है.


कतर की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के भीतर भी मतभेद हैं. जहाँ राष्ट्रपति पेजेशकियन आर्थिक दबाव के कारण बातचीत के लिए कुछ लचीलापन दिखा रहे हैं, वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) इसे एक 'अस्तित्व की लड़ाई' मान रहे हैं और अंत तक लड़ने को तैयार हैं.


फिलहाल, दुनिया की नजरें पाकिस्तान के इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहाँ गुरुवार तक एक संभावित शांति बैठक होने की चर्चा है. क्या ट्रम्प का यह 'आर्ट ऑफ द डील' सफल होगा या मध्य पूर्व एक और लंबे संघर्ष की ओर बढ़ेगा, यह आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP