क्या भविष्य के युद्धों में 'शूट' करने का अंतिम निर्णय AI लेंगे?
नई दिल्ली । डेस्क: आधुनिक युद्धक्षेत्र की बदलती तस्वीर ने आज एक गंभीर वैश्विक बहस को जन्म दे दिया है कि क्या आने वाले समय में जीवन और मृत्यु का अंतिम निर्णय इंसान नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के एल्गोरिदम लेंगे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के जनरल ब्रैड कूपर के हालिया बयानों ने इस अंदेशे को और हवा दी है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिकी सेना ईरान से जुड़े संघर्षों और अन्य अभियानों में उन्नत एआई उपकरणों का व्यापक उपयोग कर रही है.
हालांकि सैन्य नेतृत्व का दावा है कि 'शूट' करने या निशाना साधने का अंतिम फैसला हमेशा मानव कमांडर ही लेंगे, लेकिन जिस गति से एआई विशाल डेटा को प्रोसेस कर रहा है, उसने मानव नियंत्रण की सीमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
उदाहरण के तौर पर, जो सैन्य गणनाएं पहले घंटों या दिनों में पूरी होती थीं, वे अब एआई की मदद से कुछ सेकंड में सिमट गई हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि युद्ध की गति इतनी तेज हो गई है कि मानवीय सोच और नैतिकता के लिए समय लगातार कम होता जा रहा है, जिससे भविष्य में स्वायत्त हथियार प्रणालियों (Autonomous Weapons) का मार्ग प्रशस्त हो रहा है.
इस तकनीक-आधारित युद्ध के पीछे सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों का एक गहरा नेटवर्क काम कर रहा है. दशकों पहले आईबीएम द्वारा बैलिस्टिक गणनाओं के लिए बनाए गए कैलकुलेटर या 1970 के दशक में सटीक बमबारी के लिए विकसित जीपीएस (GPS) तकनीक आज के एआई युग की नींव थी.
वर्तमान में, गूगल का 'प्रोजेक्ट मेवन' ड्रोन इमेजरी के विश्लेषण को स्वचालित कर रहा है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट का 'IVAS' हेडसेट सैनिकों को युद्धक्षेत्र में एक 'टर्मिनेटर' जैसी दृश्य क्षमता प्रदान कर रहा है. पालंटिर (Palantir) जैसी कंपनियां अपने 'गोथम' सॉफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी और डेटा माइनिंग को इस स्तर पर ले गई हैं कि दुश्मन की पहचान अब पूरी तरह सॉफ्टवेयर-आधारित हो चुकी है.
हाल की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अभियानों में एंथ्रोपिक (Anthropic) के 'क्लाउड' एआई का उपयोग किया गया, जबकि कंपनी की नीतियां स्पष्ट रूप से हिंसा और निगरानी में इसके उपयोग की मनाही करती हैं. यह विरोधाभास दर्शाता है कि जब युद्ध की जरूरतें सामने आती हैं, तो एआई सुरक्षा के नियम अक्सर पीछे छूट जाते हैं.
इजरायल-गाजा संघर्ष जैसे हालिया उदाहरणों ने इन चिंताओं को हकीकत में बदल दिया है, जहां संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार एआई-आधारित प्रणालियों का उपयोग बड़े पैमाने पर लक्ष्य निर्धारण के लिए किया गया. जब एआई सिस्टम किसी व्यक्ति या स्थान को 'लक्ष्य' के रूप में चिह्नित करता है, तो मानव ऑपरेटर के पास उस मशीन-जनरेटेड डेटा को चुनौती देने का समय या संसाधन बहुत कम होता है.
अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) द्वारा संचालित पेंटागन का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेसएक्स का 'स्टारशील्ड' जासूसी नेटवर्क इस एआई मशीनरी को रीढ़ प्रदान कर रहे हैं. यद्यपि ओपेनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां सुरक्षा मानकों और निगरानी पर प्रतिबंध की बात करती हैं, लेकिन पेंटागन के साथ उनके बढ़ते अनुबंध बताते हैं कि तकनीकी स्वायत्तता अब युद्ध का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है.
अंततः, खतरा यह नहीं है कि मशीनें विद्रोह कर देंगी, बल्कि खतरा यह है कि युद्ध का निर्णय लेने की प्रक्रिया इतनी जटिल और तेज हो जाएगी कि इंसान केवल एक औपचारिक 'रबर स्टैम्प' बनकर रह जाएगा और वास्तविक 'ट्रिगर' एल्गोरिदम के हाथों में होगा.