'ISRO को क्यों किया जा रहा है पंगु?' कांग्रेस का मोदी सरकार से सवाल
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस ने केंद्र सरकार की अंतरिक्ष नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि मोदी सरकार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का "आक्रामक निजीकरण" करने में जुटी है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत बयान जारी कर सरकार के इस रुख पर कई गंभीर सवाल खड़े किए.
जयराम रमेश ने कहा कि देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में इसरो की भूमिका को सीमित किया जा रहा है और इसकी उपग्रह तथा रॉकेट विकास से जुड़ी परिसंपत्तियों को निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले दूसरे स्पेसपोर्ट को भी एक निजी कंपनी के हाथों में सौंपने की तैयारी है, जिससे आंध्र प्रदेश स्थित ऐतिहासिक श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट के भविष्य पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं.
कांग्रेस नेता ने कहा कि विक्रम साराभाई, सतीश धवन, ब्रह्म प्रकाश, यू.आर. राव और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसी महान हस्तियों और वैज्ञानिकों की छह दशकों की अनवरत मेहनत से इसरो ने देश को दुनिया भर में गौरवान्वित किया है. हालांकि अंतरिक्ष क्षेत्र के नए स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, लेकिन इसके नाम पर इसरो जैसी सफल संस्था को कमजोर करना पूरी तरह अनुचित है.
जयराम रमेश ने दावा किया कि संगठन के भविष्य को लेकर बन रही अनिश्चितता के कारण पिछले कुछ महीनों में 100 से 120 प्रमुख वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इसरो छोड़ चुके हैं.
उन्होंने कहा कि 2018 में भाजपा में शामिल हुए पूर्व इसरो अध्यक्ष (जी. माधवन नायर) ने भी इस निजीकरण अभियान पर चिंता जताई है. कांग्रेस ने मांग की है कि इसरो के अन्य पूर्व अध्यक्षों और वैज्ञानिकों को भी इस गंभीर मुद्दे पर देश के सामने अपनी बात रखनी चाहिए.