जन्म के तुरंत बाद क्यों रोता है बच्चा?
नई दिल्ली । डेस्क: जन्म के साथ ही बच्चे का रोना एक ऐसा दृश्य है जिससे लगभग हर कोई परिचित है. दुनिया के लगभग सभी अस्पतालों में किसी न किसी समय यह सामान्य तस्वीर देखने को मिलती है.
लेकिन सवाल यह है कि नवजात शिशु जन्म के क्षण में रोता क्यों है? जन्म के समय कोई भी शिशु क्यों नहीं हंसता या पूरी तरह से शांत रहता है? वैज्ञानिक लंबे समय से इस पर शोध कर रहे हैं.
क्या वास्तव में रोना अनिवार्य है? चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, नवजात का रोना कोई भावना, डर या दर्द की अभिव्यक्ति नहीं है. यह शिशु के शरीर में एक नई शुरुआत का संकेत है.अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है कि जन्म के समय बच्चों को वैसा कोई दर्द महसूस नहीं होता है, जिसे आमतौर पर रोने का कारण माना जाता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग नौ महीनों तक प्रत्येक शिशु गर्भ के अंदर पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में रहता है. वह स्थिति पूरी तरह से अलग होती है. अलग से साँस लेने की भी आवश्यकता नहीं होती है. लेकिन जन्म के साथ ही शिशु को पहली बार स्वयं से साँस लेनी पड़ती है. अचानक से हवा फेफड़ों में प्रवेश करती है. पहली गहरी साँस लेने के दौरान जो दबाव बनता है, वही शिशु के रोने का मुख्य कारण है.
रोने के परिणामस्वरूप, फेफड़ों की छोटी वायु थैली या एल्विओलाई तेजी से हवा से भर जाती हैं. साँस लेने की पूरी प्रणाली तुरंत सक्रिय हो जाती है.इसके साथ ही, तापमान और वातावरण में बदलाव भी रोने का एक अन्य कारण है. वैज्ञानिक बताते हैं कि गर्भ के अंदर का तापमान लगभग 37 C होता है.
जन्म के बाद, नवजात अचानक एक नई दुनिया में प्रवेश करता है. पहली बार प्रकाश देखना, हवा का स्पर्श महसूस करना, गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव महसूस करना, इन सबका प्रभाव रोने के माध्यम से बाहर आता है.
जन्म के समय शिशु का रोना चिकित्सकों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसे नवजात की स्वस्थता का एक मुख्य लक्षण माना जाता है. रोना मुख्य रूप से यह बताता है कि शिशु की साँस लेना सामान्य रूप से शुरू हो गया है. यदि कोई शिशु जन्म के समय नहीं रोता है, तो चिकित्सक बच्चे की पीठ, पैरों को हल्के से छूकर साँस लेने की प्रक्रिया को सक्रिय करते हैं.
बहुत ही दुर्लभ मामलों में ऐसा भी हो सकता है कि बच्चा बिना रोए शांति से साँस ले रहा हो. हालाँकि, कई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या कोई बच्चा हंसते हुए जन्म ले सकता है? विज्ञान का स्पष्ट उत्तर 'नहीं' है. आज तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई है जहाँ कोई नवजात जन्म के क्षण में हंस रहा हो. जन्म के समय नवजात का मस्तिष्क इतना परिपक्व नहीं होता है कि वह हंस सके.