ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफा क्यों दिया?
लंदन । डेस्क: यूनाइटेड किंगडम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. साल 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाकर सत्ता में लाने वाले प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है. प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल दो साल से भी कम समय का रहा. विश्लेषकों का मानना है कि स्टार्मर के इस फैसले के बाद ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम के ब्रिटिश प्रधानमंत्री आवास पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है.
इस्तीफे के पीछे का राजनीतिक दबाव:
कीर स्टार्मर का यह फैसला अचानक नहीं आया है, बल्कि वे पिछले कई महीनों से अपनी ही पार्टी के सांसदों और कैबिनेट मंत्रियों के भारी दबाव का सामना कर रहे थे. लेबर पार्टी के भीतर यह डर लगातार बढ़ रहा था कि स्टार्मर के नेतृत्व में पार्टी की चुनावी स्थिति कमजोर हो रही है.
खासकर मई में हुए स्थानीय काउंसिल चुनावों में लेबर पार्टी के बेहद निराशाजनक प्रदर्शन और दक्षिणपंथी पार्टी 'रिफॉर्म यूके' के तेजी से होते उभार ने स्टार्मर की कुर्सी हिलाने में मुख्य भूमिका निभाई.
सोमवार को 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा, "मेरी पार्टी के भीतर अब यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हूं. मैंने अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुन लिया है और मैं इसे पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं."
स्टार्मर के इस फैसले के बाद अब ब्रिटेन में पिछले एक दशक के भीतर सातवें प्रधानमंत्री को चुनने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.
स्थानीय चुनावों में करारी हार और 'रिफॉर्म यूके' का उभार:
लेबर पार्टी ने भले ही 2024 के आम चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद से ही स्टार्मर की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा. दूसरी ओर, नाइजेल फराज के नेतृत्व वाली अप्रवासी विरोधी और दक्षिणपंथी पार्टी 'रिफॉर्म यूके' का समर्थन अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है.
पिछले महीने हुए स्थानीय काउंसिल चुनावों को सीधे तौर पर कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखा गया था. इन चुनावों में लेबर पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा और उसने 1,496 काउंसिल सीटें गंवा दीं.
इसके विपरीत, 'रिफॉर्म यूके' ने जबरदस्त पैठ बनाते हुए 1,453 पार्षद पदों पर जीत दर्ज की, जिनमें से अधिकांश सीटें उन्होंने लेबर पार्टी के गढ़ से छीनीं. इतना ही नहीं, रिफॉर्म यूके ने 14 काउंसिलों पर अपना नियंत्रण भी स्थापित कर लिया.
हर मोर्चे पर घटता जनसमर्थन:
स्टार्मर के इस्तीफे की एक बड़ी वजह यह भी रही कि लेबर पार्टी राजनीतिक स्पेक्ट्रम के दोनों छोरों पर अपना जनाधार खो रही थी. रिफॉर्म यूके के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए स्टार्मर ने आव्रजन पर कड़ा रुख अपनाने की कोशिश की, लेकिन उनकी यह रणनीति पूरी तरह विफल रही.
वे न तो कंजर्वेटिव पार्टी के उन पूर्व मतदाताओं को अपनी ओर खींच पाए जो रिफॉर्म यूके की तरफ जा रहे थे, और न ही उत्तरी इंग्लैंड में लेबर पार्टी के पारंपरिक कामकाजी वर्ग के भरोसे को बरकरार रख सके.
इसके साथ ही, लेबर पार्टी के भीतर मौजूद प्रगतिशील और वामपंथी धड़े के नेता भी स्टार्मर से नाराज चल रहे थे. पार्टी के आलोचकों का मानना है कि इजरायल-गाजा विवाद पर स्टार्मर का रुख और देश में कल्याणकारी योजनाओं में की गई कटौती के फैसले के कारण पार्टी का पारंपरिक प्रगतिशील वोट बैंक उससे छिटक गया.
इन तमाम मोर्चों पर मिल रही विफलताओं के कारण लेबर सांसदों को डर था कि यदि यही स्थिति रही, तो जुलाई 2029 तक होने वाले अगले आम चुनाव में पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ सकता है.
अब आगे क्या होगा?
कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे जब तक कि लेबर पार्टी के नए नेता का चयन नहीं हो जाता. उन्होंने कहा, "मैंने आज सुबह महामहिम किंग चार्ल्स को अपने फैसले की जानकारी दे दी है. मैं लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति से नामांकन की प्रक्रिया 9 जुलाई से शुरू करने और उसे 16 जुलाई (संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश) तक पूरा करने की समय-सीमा तय करने का अनुरोध करूंगा." इस समय-सीमा के तहत सितंबर में संसद सत्र शुरू होने से पहले ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा.
लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार, नेतृत्व की रेस में शामिल होने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 20 प्रतिशत लेबर सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है. संसद में लेबर पार्टी की 403 सीटों के गणित के हिसाब से उम्मीदवार को 81 सांसदों का लिखित समर्थन चाहिए होगा.
एंडी बर्नहैम सबसे मजबूत दावेदार:
इस नेतृत्व प्रतियोगिता में ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है. बर्नहैम ने हाल ही में उत्तरी इंग्लैंड की मेकरफील्ड सीट पर हुए उपचुनाव में 55 प्रतिशत वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की है और वे संसद सदस्य के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. उन्होंने 'रिफॉर्म यूके' के उम्मीदवार को 9,200 से अधिक वोटों से हराया है, जिसके बाद पार्टी के भीतर उनका कद काफी बढ़ गया है.
बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे लेबर पार्टी के पारंपरिक कामकाजी वर्ग में बेहद लोकप्रिय हैं. यदि बर्नहैम के सामने कोई अन्य उम्मीदवार खड़ा नहीं होता है या कोई आवश्यक समर्थन नहीं जुटा पाता है, तो उन्हें सीधे तौर पर पार्टी का नेता और देश का अगला प्रधानमंत्री चुन लिया जाएगा.
पूर्व स्वास्थ्य सचिव वेस स्ट्रीटिंग और पूर्व उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर जैसी बड़ी हस्तियों ने भी बर्नहैम को अपना समर्थन दे दिया है, जिससे बर्नहैम का रास्ता और भी आसान हो गया है. नए नेता के चुने जाने के बाद किंग चार्ल्स उन्हें सरकार बनाने का न्योता देंगे.