ईरान के अयातुल्ला अली खामेनेई कौन हैं?
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया भीषण हमलों के बीच पूरी दुनिया की नजरें एक बार फिर अयातुल्ला अली खामेनेई पर टिक गई हैं, जो पिछले कई दशकों से मध्य-पूर्व की राजनीति के सबसे शक्तिशाली और विवादास्पद चेहरों में से एक रहे हैं. 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के 'सर्वोच्च नेता' के पद पर काबिज हैं.
उन्होंने यह जिम्मेदारी ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद संभाली थी. खुमैनी ने ही 1979 की क्रांति का नेतृत्व किया था, जिसने अमेरिका के करीबी सहयोगी शाह मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता से बेदखल कर दिया था.
खामेनेई केवल एक राजनीतिक प्रमुख नहीं हैं, बल्कि वे देश के सर्वोच्च आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी हैं. ईरान की शासन व्यवस्था में उनके पास अंतिम और निर्णायक शक्ति होती है; सरकार की सभी शाखाओं, सेना (विशेषकर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) और न्यायपालिका पर उनका पूर्ण नियंत्रण रहता है.
खामेनेई का लंबा कार्यकाल पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल के साथ निरंतर टकराव का इतिहास रहा है. उन्होंने अमेरिका को ईरान का "नंबर एक दुश्मन" घोषित कर रखा है और इजरायल के अस्तित्व को चुनौती देना उनकी विदेश नीति का मुख्य केंद्र रहा है. उनके शासनकाल में ईरान ने कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, आर्थिक संकटों और मानवाधिकारों को लेकर हुए कई आंतरिक विरोध प्रदर्शनों का सामना किया है, लेकिन खामेनेई अपनी सत्ता और विचारधारा पर अडिग रहे हैं.
उनकी शक्ति का सबसे बड़ा स्तंभ ईरान की दो प्रमुख सुरक्षा संस्थाएं हैं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बासिज अर्धसैनिक बल. ये दोनों संगठन सीधे उनके प्रति जवाबदेह हैं और देश के भीतर किसी भी चुनौती को कुचलने में सक्षम माने जाते हैं.
वर्तमान तनाव के केंद्र में ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, जिसे लेकर खामेनेई का दावा रहा है कि यह केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है और ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. हालांकि, अमेरिका और इजरायल उनके इस दावे पर संदेह करते रहे हैं.
ताजा हमलों के बाद, जिसमें खामेनेई के आवास और कार्यालयों के करीबी इलाकों को निशाना बनाया गया, इजरायल और अमेरिका के नेतृत्व ने उन्हें सीधे तौर पर चेतावनी दी है. इजरायली नेतृत्व ने तो यहाँ तक कहा है कि खामेनेई का सत्ता में बने रहना अब संभव नहीं है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें एक "आसान लक्ष्य" करार दिया है.
शनिवार के हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब रणनीति केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे उस नेतृत्व को निशाना बनाने की है जिसने दशकों से पश्चिम की आंखों में आंखें डालकर चुनौती दी है. तेहरान के शेमीरान इलाके में हुए इन हमलों के बाद अब सवाल खामेनेई की सुरक्षा और ईरान के भविष्य पर टिका है.