इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पर विदेशी मीडिया का क्या कहना है?
नई दिल्ली । डेस्क: नई दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को विदेशी मीडिया ने भारत की बढ़ती वैश्विक एआई महत्वाकांक्षा और ग्लोबल साउथ में पहली बार ऐसे बड़े आयोजन के रूप में प्रमुखता से कवर किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित इस पांच दिवसीय समिट को कई अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और आउटलेट्स ने भारत के एआई गवर्नेंस में विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखा है, हालांकि उद्घाटन दिवस पर लॉजिस्टिकल चुनौतियों पर भी काफी चर्चा हुई.
रॉयटर्स (Reuters) ने समिट के उद्घाटन को भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं का शोकेस बताते हुए रिपोर्ट किया कि यह पहली बार है जब ग्लोबल साउथ में ऐसा बड़ा एआई इवेंट हो रहा है. एजेंसी ने बताया कि समिट में 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 से अधिक वैश्विक एआई लीडर्स शामिल हैं, जिसमें ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल के सुंदर पिचाई और माइक्रोसॉफ्ट के ब्रैड स्मिथ जैसे बड़े नाम हैं.
लेकिन उद्घाटन दिन की खबरों में फोकस लंबी कतारों, ओवरक्राउडिंग, खराब साइनेज और संगठनात्मक खामियों पर रहा. रॉयटर्स ने कई डेलीगेट्स के हवाले से लिखा कि अस्पष्ट निर्देशों के कारण कई लोगों को अपनी चीजें वापस लेने में परेशानी हुई और कुछ सेशन में जगह नहीं मिली. एजेंसी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के इवेंट के लिए खराब ऑप्टिक्स बताया, जो भारत की टेक्नोलॉजी प्रॉवेस मैसेजिंग को प्रभावित कर सकता है.
बीबीसी (BBC) ने भी समिट को "लैंडमार्क गेदरिंग" कहा, लेकिन पहले दिन की लॉजिस्टिकल अराजकता पर फोकस किया. रिपोर्ट में डेलीगेट्स की शिकायतें शामिल हैं कि घंटों इंतजार करना पड़ा, ओवरक्राउडिंग थी और कन्फ्यूजन के कारण कई लोग परेशान हुए. बीबीसी ने इसे ग्लोबल साउथ में पहला बड़ा एआई मीटिंग बताते हुए भारत की भूमिका को हाइलाइट किया, जहां 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं.
अल जजीरा (Al Jazeera) और एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने समिट को हाई-स्टेक्स इवेंट करार दिया, जहां भारत ग्लोबल एआई नियमों को आकार देने की कोशिश कर रहा है. दोनों ने मोदी के उद्घाटन और "शेयरड रोडमैप फॉर ग्लोबल एआई गवर्नेंस" के लक्ष्य पर जोर दिया. अल जजीरा ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के लूला डा सिल्वा जैसे लीडर्स की भागीदारी को उल्लेखनीय बताया, साथ ही जॉब डिसरप्शन और चाइल्ड सेफ्टी जैसे हॉट-बटन इश्यूज पर चर्चा का जिक्र किया.
ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने चीनी नजरिए से समिट को कवर करते हुए कहा कि यह भारत की ग्लोबल एआई बूम में शामिल होने की कोशिश दर्शाता है. विशेषज्ञ लियू वेई के हवाले से रिपोर्ट में लिखा कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी और 1 अरब से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स के डेमोग्राफिक डिविडेंड से फायदा उठाकर अमेरिका और चीन के अलावा तीसरा बड़ा प्लेयर बनना चाहता है.
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि भारत में डेटा गवर्नेंस अभी भी अव्यवस्थित है और एआई पॉलिसी में स्थिरता की कमी है. फाउंडेशनल रिसर्च, कंप्यूटिंग रिसोर्सेज और टैलेंट डेप्थ में चुनौतियां बनी हुई हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है.
कुल मिलाकर, विदेशी मीडिया समिट को भारत के एआई लीडरशिप क्लेम और ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में महत्वपूर्ण मान रहा है, लेकिन पहले दिन की व्यवस्थागत समस्याओं ने कुछ नेगेटिव हाइलाइट्स भी दी हैं. समिट 20 फरवरी तक चलेगा, जहां एआई के जिम्मेदार विकास पर साझा रोडमैप तैयार करने की उम्मीद है.