खामेनेई की मौत पर क्या कहते हैं दुनिया के लीडरान?
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की एक संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हमले में मौत ने पूरी दुनिया को दो वैचारिक धड़ों में बाँट दिया है. जहाँ पश्चिम के कुछ देश इसे एक "तानाशाह" के अंत के रूप में देख रहे हैं, वहीं कई अन्य देश इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाला कृत्य बता रहे हैं.
यहाँ विभिन्न देशों और वैश्विक नेताओं के आधिकारिक बयान दिए गए हैं:ईरान: "एक महान शहादत और युद्ध की शुरुआत"
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने खामेनेई की मौत को "मुसलमानों के खिलाफ युद्ध की खुली घोषणा" कहा है. उन्होंने देश में 40 दिनों के शोक की घोषणा करते हुए कहा कि ईरान इस 'कायरतापूर्ण हमले' का ऐसा जवाब देगा जिसे इतिहास याद रखेगा. ईरान की IRGC ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वे क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली अस्तित्व को मिटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
संयुक्त राज्य अमेरिका: "ईरानियों के पास अपनी आजादी का मौका"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खामेनेई को "इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक" बताया. उन्होंने कहा कि यह ईरानी लोगों के लिए अपने देश को वापस पाने का सबसे बड़ा अवसर है. ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने पलटवार किया, तो अमेरिका उस पर "अकल्पनीय ताकत" से हमला करेगा.
इजरायल: "न्याय की ऐतिहासिक जीत"
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले की सफलता पर संतोष व्यक्त किया. काट्ज़ ने कहा, "जो इजरायल को मिटाना चाहता था, वह खुद मिट गया." इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य कदम और 'बुराई की धुरी' के लिए एक घातक झटका बताया है.
रूस: "मानवीय नैतिकता का उल्लंघन"
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस हत्या की तीव्र निंदा करते हुए इसे "नीच हत्या" करार दिया. उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मानदंडों का सीधा उल्लंघन है. रूस ने चेतावनी दी कि इस तरह के 'दुस्साहस' से मध्य पूर्व में एक बड़ी तबाही आ सकती है.
चीन: "संप्रभुता पर हमला स्वीकार्य नहीं"
चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह इस हमले की "कड़ी निंदा" करता है. चीन ने इसे ईरान की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अपमान बताया. बीजिंग ने सभी पक्षों से तुरंत युद्ध रोकने और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है.
यूरोपीय देश: संतुष्टि और चिंता का मिला-जुला रुख
यूरोपीय संघ (EU): विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने इसे ईरान के लिए एक "निर्णायक क्षण" कहा और भविष्य के बदलावों के प्रति आशा जताई.
ब्रिटेन: रक्षा सचिव जॉन हीली ने कहा कि खामेनेई की मौत पर "शायद ही कोई शोक मनाएगा," क्योंकि उनका शासन पश्चिम और अपने ही लोगों के लिए एक खतरा था.
फ्रांस: आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, फ्रांस ने खामेनेई को एक 'तानाशाह' बताते हुए उनकी मौत पर "संतोष" व्यक्त किया है.
जर्मनी: जर्मन चांसलर ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने और क्षेत्र को और अधिक अस्थिरता से बचाने की वकालत की है.
भारत: "संयम और कूटनीति की अपील"
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से "संयम और कूटनीति" बरतने की अपील की है. भारत ने जोर दिया कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. भारतीय सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी इसे "लक्षित हत्या" बताते हुए गांधीजी के उस कथन को याद किया कि "आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा कर देती है."
ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस: सुरक्षा सर्वोपरि
ऑस्ट्रेलिया: सरकार ने कहा कि खामेनेई की मौत पर शोक नहीं मनाया जाएगा, क्योंकि उन्होंने दशकों तक मिसाइल हमलों और छद्म युद्धों को बढ़ावा दिया.
फिलीपींस: मनीला ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और प्राथमिकता अपने नागरिकों को संघर्ष क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालना है.
इस्लामी जगत और सहयोगी समूह
हमास और हूती: इन समूहों ने इसे एक "जघन्य अपराध" बताया और अमेरिका-इजरायल को इसके गंभीर परिणामों के लिए जिम्मेदार ठहराया.
पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी जनता के प्रति संवेदना व्यक्त की. हालांकि, कराची में अमेरिकी दूतावास के बाहर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में कई लोगों के हताहत होने की भी खबर है.
उत्तर कोरिया: प्योंगयांग ने इसे "अवैध आक्रमण" बताते हुए अमेरिका पर 'गैंगस्टर' जैसी व्यवहार करने का आरोप लगाया.
जाहिर है कि खामेनेई की मौत ने दुनिया को दो स्पष्ट ध्रुवों में बांट दिया है. एक तरफ जहां लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बात करने वाले देश इसे बदलाव के अवसर के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई देश इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए एक खतरनाक मिसाल मान रहे हैं.