महाराष्ट्र के धर्मांतरण विरोधी विधेयक 2026 के मसौदे में क्या है?
मुंबई । डेस्क: महाराष्ट्र कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 'धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026' के मसौदे में धर्मांतरण को लेकर कड़े प्रावधान किए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य बलपूर्वक या धोखाधड़ी से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है. इस विधेयक के अनुसार, अब राज्य में स्वेच्छा से धर्म बदलने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को भी कम से कम 60 दिन पहले संबंधित सक्षम प्राधिकारी को नोटिस देना होगा और अनुमति प्राप्त करनी अनिवार्य होगी.
प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होती. धर्मांतरण होने के 25 दिनों के भीतर उसका आधिकारिक पंजीकरण कराना भी जरूरी है, और ऐसा न करने पर उस धर्मांतरण को कानूनन 'शून्य और अवैध' माना जाएगा.
मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी धर्मांतरण के विरुद्ध व्यक्ति का कोई रक्त संबंधी शिकायत दर्ज कराता है, तो पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज कर मामले की गहन जांच करनी होगी.
यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता को स्पष्ट करते हुए कहता है कि किसी भी व्यक्ति के पास प्रलोभन, बल या कपट के माध्यम से दूसरे का धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं है, बल्कि नागरिकों को ऐसे अवैध प्रयासों से सुरक्षा प्रदान करना इस कानून का मूल आधार है.
भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे के अनुसार, यह कानून 'लव जिहाद' जैसी चुनौतियों से निपटने और हिंदुत्व संगठनों की पुरानी मांग को पूरा करने के लिए लाया गया है. सरकार जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक शासन निर्णय जारी करेगी, जिसके बाद इसे विधानमंडल में पेश कर कानून का रूप दिया जाएगा.