हथियार कंपनियों की रिकॉर्ड तोड़ कमाई, US ने सबसे ज्यादा कमाया
नई दिल्ली । डेस्क: दुनिया भर की बड़ी हथियार बनाने वाली कंपनियों ने 2024 में अपनी कमाई का नया रिकॉर्ड बनाया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की टॉप 100 रक्षा कंपनियों ने करीब 679 अरब डॉलर का हथियार बेचा.
यह आंकड़ा पिछले साल से 6 फीसदी ज्यादा और 2015 के मुकाबले 26 फीसदी अधिक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन और गाजा में चल रहे युद्धों ने सरकारों को हथियार जमा करने और पुराने स्टॉक भरने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे यह तेजी आई.
एसआईपीआरआई के सैन्य खर्च और हथियार उत्पादन विशेषज्ञ लोरेंजो स्काराजाटो ने कहा, "पिछले साल वैश्विक हथियार राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया क्योंकि उत्पादक कंपनियां ऊंची मांग पर टिकी रहीं."
रिपोर्ट बताती है कि हथियारों की डिमांड ज्यादातर यूरोप से आ रही है. एशिया और ओशिनिया को छोड़कर बाकी सभी इलाकों में बिक्री बढ़ी. एक अन्य विशेषज्ञ जेड गुइबार्तो रिकार्ड ने यूरोप की बढ़ती मांग का श्रेय यूक्रेन युद्ध को दिया. उन्होंने कहा कि रूस के खतरे से डरे यूरोपीय देश अपनी सेनाओं को मजबूत कर रहे हैं.
यहां तक कि कीव को सीधे हथियार न देने वाले देश भी अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. रिकार्ड का अनुमान है कि इससे मांग का नया स्रोत बनेगा.
अमेरिका अभी भी दुनिया का हथियार उत्पादन का केंद्र बना हुआ है. टॉप 100 कंपनियों में से 39 अमेरिकी हैं, जिनमें लॉकहीड मार्टिन, आरटीएक्स और नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन जैसी दिग्गज शामिल हैं. इन अमेरिकी कंपनियों ने कुल 334 अरब डॉलर की बिक्री की, जो वैश्विक कुल का लगभग आधा है.
यूरोप ने सबसे तेज ग्रोथ दिखाई, जहां राजस्व 13 फीसदी बढ़कर 151 अरब डॉलर हो गया. यहां चेक गणराज्य की कंपनी चेकोस्लोवाक ग्रुप ने सबसे ज्यादा छलांग लगाई. इसकी बिक्री दोगुनी से ज्यादा हो गई, क्योंकि इसने यूक्रेन को तोपखाने के गोले सप्लाई किए.
रूस की रक्षा कंपनियां भी पीछे नहीं रहीं. प्रतिबंधों और हाई-टेक पार्ट्स की कमी के बावजूद रोस्टेक और यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियों का राजस्व 23 फीसदी बढ़ा. एशिया-प्रशांत क्षेत्र अकेला ऐसा है जहां बिक्री घटी.
चीन में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद खरीदारी कम हुई. हालांकि, जापान और दक्षिण कोरिया की कंपनियों में ग्रोथ हुई, जिसमें यूरोपीय खरीदारों का बड़ा हाथ है.
मध्य पूर्व में राजस्व 31 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इजरायली कंपनियां आगे रहीं, जहां निर्यात की डिमांड अभी भी बुलंद है. एसआईपीआरआई की जुबैदा करीम ने कहा, "गाजा में इजरायल की कार्रवाइयों पर बढ़ती प्रतिक्रियाओं का इजरायली हथियारों में रुचि पर ज्यादा असर नहीं पड़ा."
यह रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक तनाव हथियार उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इससे शांति प्रयासों को झटका लग सकता है. (Symbolic Photo)