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AI और क्लाउड के कारण मंडराया जल संकट, नई कूलिंग तकनीक से समाधान की उम्मीद

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03 मई 2026, 01:39 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

AI Data Centre
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नई दिल्ली । डेस्क: भारत में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग सेक्टर की पानी की खपत को लेकर पर्यावरणविदों ने गंभीर चिंता जताई है. नेट-कनेक्ट फाउंडेशन के एक आकलन के अनुसार, भारत का डेटा सेंटर उद्योग सालाना लगभग 37.5 अरब लीटर पानी की खपत कर सकता है. 


यह मात्रा मुंबई जैसे महानगर की एक सप्ताह की जल आपूर्ति या करीब 7 से 8 लाख लोगों की वार्षिक जरूरतों के बराबर है.


इस चेतावनी के बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि उद्योग जगत जल संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. 


जल शक्ति मंत्रालय के अवर सचिव शंभू नाथ गुप्ता ने बताया कि देश में डेटा सेंटर की क्षमता 2020 के 375 मेगावाट से बढ़कर 2025 में 1,500 मेगावाट से अधिक हो गई है. 


उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बढ़ती मांग से निपटने के लिए डेटा सेंटर्स अब पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक कूलिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.


मंत्रालय के अनुसार, जल की बर्बादी रोकने के लिए 'डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग', 'एडियाबेटिक कूलिंग' और 'इमर्सन सिस्टम' जैसी एडवांस तकनीकों को अपनाया जा रहा है. 


इसके अतिरिक्त, सरकार संसाधन स्थिरता के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग, अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और डिजिटल माध्यम से भूजल स्तर की निगरानी जैसे प्रयासों को भी बढ़ावा दे रही है ताकि तकनीक की प्रगति के साथ-साथ भारत की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP