युद्ध से केवल इजरायल के हितों की पूर्ति- राष्ट्रपति ईरान
तेहरान । डेस्क: तेहरान टाइम्स के हवाले से खबर है कि मध्य पूर्व में गहराते सैन्य संकट और कूटनीतिक हलचलों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का एक बड़ा बयान सामने आया है. तेहरान में पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में राष्ट्रपति मसूद ने साफ तौर पर कहा कि क्षेत्र में जारी युद्ध और तनाव केवल और केवल इजरायल के हितों की पूर्ति करता है. उन्होंने आगाह किया कि इस संघर्ष से किसी भी अन्य देश का भला नहीं होने वाला है, बल्कि पूरी दुनिया को इसका गंभीर हर्जाना भुगतना पड़ेगा.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान दोनों देशों (अमेरिका और ईरान) के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए युद्ध को टालने का प्रयास कर रहा है.
युद्ध से केवल इजरायल के हितों की पूर्ति- राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन
पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख के साथ चर्चा के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने वाशिंगटन की बातचीत की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने अमेरिका के साथ पिछले कूटनीतिक अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वाशिंगटन पर भरोसा करना घाटे का सौदा है.
राष्ट्रपति मसूद ने इजरायल की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा:
"हम केवल अपने राष्ट्र के अपरिहार्य और कानूनी अधिकारों को बनाए रखना चाहते हैं. इस पूरे संघर्ष में अमेरिका कभी भी विजयी होकर नहीं निकलेगा. इस युद्ध से केवल क्षेत्रीय देशों और दुनिया भर के देशों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ेगा. ज़ियोनिस्ट शासन (इजरायल) ही एकमात्र ऐसा पक्ष है जो इस तबाही के जरिए क्षेत्र में अपने निजी और रणनीतिक हितों को साधने की कोशिश कर रहा है."
पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल मुनीर ने भी राष्ट्रपति मसूद के इस दृष्टिकोण का पुरजोर समर्थन किया. मुनीर ने कहा कि इजरायल क्षेत्र के मुस्लिम देशों के बीच फूट डालकर और संघर्ष को हवा देकर अपना फायदा देख रहा है. उन्होंने जोड़ा कि जो कोई भी जिसमें वे खुद भी शामिल हैं तनाव कम करने की कोशिश करता है, इजरायल उसके प्रति घोर शत्रुता दिखाता है क्योंकि उसे शांति और स्थिरता में कोई दिलचस्पी नहीं है.
'अमेरिका के पास ईमानदारी की कमी': मोहम्मद बकर कलीबाफ
इस दौरे के दौरान फील्ड मार्शल मुनीर ने ईरान की संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बकर कलीबाफ से भी मुलाकात की. कलीबाफ ने भी राष्ट्रपति मसूद के रुख को आगे बढ़ाते हुए वाशिंगटन को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और वैध अधिकारों की रक्षा के लिए युद्ध के मैदान से लेकर कूटनीति की मेज तक, हर जगह डटा रहेगा.
कलीबाफ ने तल्ख लहजे में कहा कि ईरान ऐसे किसी भी देश या प्रशासन के साथ समझौते की उम्मीद नहीं रख सकता, जिसमें रत्ती भर भी ईमानदारी न हो. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की युद्ध की धमकियों का जवाब देते हुए चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने "मूर्खतापूर्ण तरीके से दोबारा युद्ध शुरू किया," तो इस बार के परिणाम पहले से भी अधिक "कुचलने वाले और कड़वे" होंगे.
पिछले 39 दिनों के युद्ध में अमेरिका को लगा बड़ा झटका
ईरानी अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि वे युद्ध की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं, क्योंकि पूर्व के संघर्षों में उन्होंने अपनी सैन्य क्षमता साबित की है. एक हालिया अमेरिकी कांग्रेसनल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि पिछले 39 दिनों के संघर्ष के दौरान ईरान ने फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया था.
इस रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस दौरान 40 से अधिक सैन्य विमान खोए, जिनमें अत्याधुनिक F-15 फाइटर जेट्स और एक F-35 लाइटनिंग II विमान भी शामिल था. इसके अलावा, ईरान के हमलों में एक दर्जन से अधिक अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी. यही कारण है कि ईरान अमेरिकी सैन्य धमकियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है.
पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें और ईरान की शर्तें
इस्लामाबाद में 11 अप्रैल को हुई पहले दौर की शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी, क्योंकि ईरान के अनुसार अमेरिका की मांगें "अत्यधिक और अनुचित" थीं. अब पाकिस्तान एक बार फिर दूसरे दौर की बातचीत के लिए जमीन तैयार करने में जुटा है.
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी शांति प्रस्ताव को तभी स्वीकार करेगा जब उसकी निम्नलिखित प्रमुख शर्तें पूरी होंगी:
क्षेत्र में सैन्य कार्रवाइयों पर पूरी तरह रोक लगे और भविष्य के लिए गैर-आक्रामकता की गारंटी दी जाए.
ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और फ्रीज की गई संपत्तियां वापस की जाएं.
सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के संप्रभु नियंत्रण को मान्यता मिले.
लेबनान पर इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों को तुरंत रोका जाए.
ईरान का रुख साफ है कि इन शर्तों के माने जाने के बाद ही वह परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की मेज पर आएगा, और वहां भी वह केवल यूरेनियम संवर्धन के स्तर पर चर्चा करेगा, अपने संवर्धन के अधिकार को कभी नहीं छोड़ेगा.
अगले 3-4 दिन बेहद नाजुक, ट्रिगर पर उंगलियां
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने शनिवार शाम को बताया कि दशकों पुरानी शत्रुता के कारण कूटनीतिक प्रक्रिया धीमी और समय लेने वाली है. हालांकि, दोनों पक्ष एक समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप देने के लिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान कर चुके हैं. बघेई ने कहा, "हमें देखना होगा कि अगले तीन से चार दिनों में क्या होता है."
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स (CBS News और Axios) के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठकें कर रहे हैं और कूटनीति के समांतर ईरान पर नए सैन्य हमलों की योजना पर भी विचार कर रहे हैं. अमेरिका के इस दोहरे रुख को देखते हुए ईरान की सेना ने भी हाई अलर्ट जारी कर दिया है. ईरानी सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी है कि उनके जवानों की उंगलियां ट्रिगर पर हैं और यदि इजरायल या अमेरिका ने कोई भी दुस्साहस किया, तो उसका अंजाम बेहद भयानक होगा.