विधायक कॉलोनी के विरोध में रायपुर में उग्र प्रदर्शन
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र अंतर्गत नकटी गांव में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 80 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया. इस कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों ने रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने 11 घंटे तक लंबा धरना प्रदर्शन किया. इस आंदोलन को कांग्रेस पार्टी का भी पुरजोर समर्थन मिला. प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई मैराथन बातचीत के बाद ग्रामीणों ने गुरुवार को अपना धरना फिलहाल स्थगित कर दिया है, लेकिन उन्होंने प्रशासन को 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है.
ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि शुक्रवार सुबह 11 बजे तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे और 'जेल भरो' आंदोलन के लिए मजबूर होंगे.
आशियाना छिनने से नाराज हैं ग्रामीण, मुआवजे की मांग
यह पूरा विवाद सोमवार को शुरू हुआ जब प्रशासन ने नकटी गांव में करीब 80 घरों पर बुलडोजर चला दिया. चौंकाने वाली बात यह है कि ध्वस्त किए गए मकानों में 'प्रधानमंत्री आवास योजना' और 'इंदिरा आवास योजना' के तहत बने 32 पक्के मकान भी शामिल थे.
बेघर हुए परिवारों का समर्थन करने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पहुंचे और उन्होंने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की. प्रभावित परिवारों की मांग है कि इस विध्वंस प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए, उन्हें उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए. इसके साथ ही विधायक कॉलोनी को कहीं और स्थानांतरित किया जाए.
सरकारी आवासों को ग्रामीणों ने नकारा
हालांकि, जिला प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद की गई है. प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मकानों में पुनर्वास की पेशकश की है. लेकिन ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा दिए जा रहे मकान आकार में बेहद छोटे हैं, जिनमें बड़े परिवारों का गुजर-बसर नामुमकिन है. साथ ही वहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है.
राजनीतिक मोड़: अपनों और विपक्ष के निशाने पर सरकार
इस मुद्दे ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है. कांग्रेस विधायक चतुरानंदा और कविता लहरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर इस योजना का कड़ा विरोध किया है. विधायक चतुरानंदा ने अपने पत्र में लिखा कि जनप्रतिनिधियों को जनता को छत देने के लिए चुना जाता है, न कि गरीबों के आशियाने उजाड़ने के लिए. उन्होंने सुझाव दिया कि नया रायपुर में सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन खाली पड़ी है, इसलिए इस प्रस्तावित विधायक कॉलोनी को वहीं शिफ्ट किया जाना चाहिए.
इस बीच, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल का एक साल पुराना पत्र भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने खुद इस जमीन चयन पर आपत्ति जताई थी और इसे अमानवीय बताया था.
दिलचस्प बात यह है कि तोड़फोड़ की कार्रवाई से महज दो दिन पहले भी ग्रामीणों ने सांसद अग्रवाल से मुलाकात की थी, तब उन्होंने आश्वासन दिया था कि मानसून खत्म होने तक कोई कार्रवाई नहीं होगी और बीच का रास्ता निकाला जाएगा. फिलहाल, कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और शुक्रवार सुबह 11 बजे की समयसीमा को देखते हुए प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है.