VHP ने अयोध्या के वकीलों के 'बॉयकॉट' का विरोध किया
अयोध्या । डेस्क: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने राम जन्मभूमि मंदिर में दान के पैसे की कथित चोरी के आरोपियों का केस न लड़ने के फैजाबाद बार एसोसिएशन के फैसले की तीखी आलोचना की है. वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बार एसोसिएशन के इस प्रस्ताव को पूरी तरह गैर-कानूनी, अनैतिक और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया है.
गौरतलब है कि फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित कर घोषणा की थी कि कोई भी वकील इस मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा. ऐसा करने वाले वकील पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का भी ऐलान किया गया था.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यद्यपि दान चोरी (चढ़ावा चोरी) जैसे घिनौने अपराध के आरोपियों के प्रति उनकी कोई सहानुभूति नहीं है और वे चाहते हैं कि मामले की त्वरित जांच कर दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए, लेकिन वे बार एसोसिएशन के इस गैर-कानूनी फैसले का समर्थन नहीं कर सकते.
आलोक कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के 2011 के प्रसिद्ध 'ए एस मोहम्मद रफी मामले' के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी आरोपी का बचाव न करने का बार एसोसिएशनों का प्रस्ताव पूरी तरह से अवैध है.
हर व्यक्ति को अदालत में अपना बचाव करने का कानूनी अधिकार है और वकीलों का यह कर्तव्य है कि वे उनका पक्ष रखें. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए सही सोच रखने वाले वकीलों को ऐसे प्रस्तावों को दरकिनार कर देना चाहिए.
एसआईटी जांच और चंपत राय का इस्तीफा:
राम मंदिर के दान में हुई कथित हेराफेरी के मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. वीएचपी ने स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद इस मामले में पारदर्शिता बरतते हुए आंतरिक जांच कराई थी, जिसके बाद 80 लाख रुपये बरामद किए गए. इसके बाद ट्रस्ट ने खुद मुख्यमंत्री से संपर्क कर विशेष जांच दल के गठन की मांग की थी और एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर ही आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई.
इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के दो दिन बाद, 27 जून को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था. वीएचपी ने दोनों का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो सके और उन पर गवाहों या सबूतों को प्रभावित करने का कोई आरोप न लगे.
विपक्ष पर साधा निशाना:
वीएचपी ने इस मौके पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर भी तीखा हमला बोला. आलोक कुमार ने कहा कि एक तरफ जहां चंपत राय और अनिल मिश्रा ने निष्पक्ष जांच के लिए तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, वहीं दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के कई बड़े नेता भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और कानूनी कार्यवाही का सामना करने के बावजूद अपने पदों पर बने रहे. वीएचपी ने इसे वैचारिक और नैतिक आचरण का एक बड़ा अंतर बताया है. Symbolic Photo.