वंदे मातरम: इतिहास को तोड़-मरोड़ रही भाजपा- चरणदास महंत
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा में 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता चरणदास महंत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. महंत ने विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि जिस गीत को गाते हुए स्वतंत्रता सेनानियों ने फांसी के फंदे को चूमा, उसे आज विभाजनकारी राजनीति का जरिया बनाना बेहद दुखद है.
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू पर लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि नेहरू ने गीत के टुकड़े नहीं किए, बल्कि संविधान सभा की सहमति से इसकी गरिमा को बनाए रखने का काम किया.
महंत ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि 'दो राष्ट्र का सिद्धांत' (टू-नेशन थ्योरी) सावरकर की पुस्तक और बाद में जिन्ना की मांग से उपजा था, इसमें नेहरू को घसीटना पूरी तरह गलत और निराधार है.
उन्होंने अपील की कि 'वंदे मातरम्' सभी भारतीयों का है और इसे राजनीतिक दुरुपयोग से मुक्त रखा जाना चाहिए.
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि दशकों तक देश पर राज करने वाली पार्टी आज विपक्ष की भूमिका निभाने में भी विफल रही है क्योंकि "तुष्टीकरण की राजनीति" उनके डीएनए में है.
सीएम साय ने आरोप लगाया कि नेहरू ने विभाजनकारी ताकतों के दबाव में आकर गीत के साथ समझौता किया, जिससे समाज में तुष्टीकरण का जहर फैला.
उन्होंने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी वंदे मातरम् बोलने वालों को जेल में डाला गया था.
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग अपनी मातृभूमि को पवित्र नहीं मान सकते, कांग्रेस उन्हें खुश करने में लगी रहती है.
विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने इस दिन को ऐतिहासिक बताते हुए 'वंदे मातरम्' को स्वतंत्रता आंदोलन की मुख्य प्रेरक शक्ति बताया. करीब पांच घंटे चली इस लंबी और तीखी बहस के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई.