यूपी: 'सत्ता परिवर्तन' के लिए हिंसा में शामिल अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगी सरकारी जॉब
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीधी भर्ती से चुने जाने वाले उम्मीदवारों के लिए चरित्र सत्यापन के नियमों को कड़ा कर दिया है. नए आदेश के तहत 'सत्ता परिवर्तन' के उद्देश्य से हिंसक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी से वंचित किया जा सकता है.
लखनऊ । डेस्क: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती के जरिए चयनित उम्मीदवारों के लिए चरित्र सत्यापन के नियमों को सख्त बना दिया है. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि "सत्ता परिवर्तन" लाने के उद्देश्य से हिंसक गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी से वंचित किया जा सकता है. यह कदम हाल ही में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान "सत्ता परिवर्तन" के आह्वान को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच उठाया गया है.
योगी आदित्यनाथ सरकार ने हालांकि यह भी साफ किया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा किसी उम्मीदवार को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराने का आधार नहीं हो सकती. जारी आदेश के अनुसार, सिर्फ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज होने या जांच लंबित रहने मात्र से किसी अभ्यर्थी को स्वचालित रूप से अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा.
इसका सीधा अर्थ यह है कि प्राधिकरण केवल मामला दर्ज होने या किसी विशेष राजनीतिक विचार रखने के आधार पर किसी आवेदक को खारिज नहीं कर सकते. इसके बजाय, फैसला चरित्र सत्यापन नियमों के तहत आने वाली परिस्थितियों, जिसमें हिंसक गतिविधियों में शामिल होना शामिल है, के आधार पर ही लिया जाएगा.
यह घटनाक्रम मतदाता सूचियों के एसआईआर (SIR) को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच हुआ है, जहां कांग्रेस और इंडिया (INDIA) गठबंधन अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर 'लोकतंत्र मार्च' का नेतृत्व किए जाने के बाद, गठबंधन अब 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित करने जा रहा है. विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटों की कथित चोरी पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.