हेल्थ एडवाइस के लिए AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल जानलेवा
नई दिल्ली । डेस्क: हाल ही में 'बीएमजे ओपन' (BMJ Open) में प्रकाशित एक शोध ने स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ती निर्भरता को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है. अध्ययन के अनुसार, चिकित्सा और स्वास्थ्य से जुड़े सवालों पर AI चैटबॉट्स द्वारा दिए गए लगभग 50 प्रतिशत जवाब या तो गलत थे या भ्रामक पाए गए.
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब 'गैलप' के सर्वेक्षणों से पता चला है कि अमेरिकी नागरिक डॉक्टर के पास जाने के बजाय त्वरित समाधान के लिए तेजी से चैटजीपीटी (ChatGPT) और जेमिनी (Gemini) जैसे टूल्स का रुख कर रहे हैं.
यूसीएलए (UCLA) के शोधकर्ताओं ने गूगल के जेमिनी, मेटा एआई, चैटजीपीटी, डीपसीक और एलन मस्क के 'ग्रोक' (Grok) का परीक्षण कैंसर, वैक्सीन और पोषण जैसे संवेदनशील विषयों पर किया.
नतीजों में पाया गया कि 49.6 प्रतिशत प्रतिक्रियाएं 'समस्याग्रस्त' थीं, जो मरीजों को गलत उपचार या नुकसान की ओर ले जा सकती हैं.
अध्ययन में विशेष रूप से 'ग्रोक' के प्रदर्शन को सबसे अधिक चिंताजनक पाया गया. शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ये चैटबॉट्स साक्ष्यों को तौलने या नैतिक निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं, बल्कि ये केवल डेटा के सांख्यिकीय पैटर्न के आधार पर जवाब देते हैं.
डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि लोग समय बचाने, पैसे की कमी या इलाज की असुविधा के कारण एआई का सहारा ले रहे हैं.
हालांकि, अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (AMA) ने स्पष्ट किया है कि एआई एक सहायक तो हो सकता है, लेकिन वह विशेषज्ञ डॉक्टर का विकल्प कभी नहीं बन सकता. इसके अलावा, एआई टूल्स के साथ साझा की जाने वाली निजी मेडिकल जानकारी की गोपनीयता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बिना डॉक्टरी परामर्श के एआई द्वारा दी गई चिकित्सा सलाह पर अमल करना जानलेवा साबित हो सकता है.