अमेरिकी नाकेबंदी से क्यूबा के सिगार उद्योग पर गहराया संकट
नई दिल्ली । डेस्क: अल-ज़जीरा के हवाले से खबर है कि हवाना के पुराने बाजारों की गलियों में जहां कभी ताजे तंबाकू और महंगे सिगारों की महक हुआ करती थी, वहां आज सन्नाटा और खाली अलमारियां क्यूबा के सबसे प्रतिष्ठित उद्योग की बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं. दुनिया भर में विलासिता और रसूख का प्रतीक माने जाने वाले 'हबनोस' सिगार आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं.
इस संकट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगाई गई 'डी फैक्टो' तेल नाकेबंदी है, जिसने न केवल क्यूबा की बिजली व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि इसके तंबाकू उत्पादन और परिवहन की कमर भी तोड़ दी है.
इस साल की शुरुआत से ही क्यूबा में ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा वेनेजुएला से तेल आपूर्ति रोकने के आदेश और तेल निर्यात करने वाले देशों पर शुल्क लगाने की धमकी ने द्वीप को ऊर्जा संकट में झोंक दिया है. स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मार्च में पहुंचे एक रूसी तेल टैंकर ने पूरे देश को बमुश्किल एक हफ्ते की राहत दी.
क्यूबा की तंबाकू खेती, विशेष रूप से पिनार डेल रियो प्रांत में, लगभग 50 प्रतिशत सिंचाई प्रणालियों के लिए बिजली पर निर्भर है. ईंधन और बिजली के अभाव में सिंचाई रुक गई है, जिससे फसलें प्रभावित हो रही हैं.
उत्पादन के स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है. परिवहन के साधनों की कमी के कारण पत्तियां फैक्ट्रियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं और बिजली कटौती के कारण रोलिंग का काम ठप पड़ा है. इस साल हवाना के प्रसिद्ध वार्षिक सिगार उत्सव का रद्द होना इस आर्थिक तबाही की आधिकारिक स्वीकारोक्ति है.
हालांकि, साल 2024 में सरकार ने सिगार निर्यात से लगभग 827 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड राजस्व की सूचना दी है, लेकिन यह आंकड़ा भ्रामक है. सिगार एसोसिएशन ऑफ कनाडा और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह राजस्व उत्पादन बढ़ने से नहीं, बल्कि कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी से आया है.
उदाहरण के लिए, स्पेन में एक 'कोहिबा सिगलो VI' की कीमत जनवरी 2022 से अब तक 178 प्रतिशत बढ़कर 105 यूरो तक पहुंच गई है. सरकार उत्पादन में आई भारी गिरावट की भरपाई कीमतों को बढ़ाकर कर रही है. आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में क्यूबा ने 9.39 करोड़ सिगार निर्यात किए थे, जो 2024 में गिरकर महज 5 करोड़ रह गए हैं.
इस पूरे संकट का सबसे मानवीय और दुखद पहलू वे मजदूर हैं जो इन सिगारों को अपने हाथों से तैयार करते हैं. हवाना की फैक्ट्रियों में 16 साल से काम कर रही एलेना हेरेरा (बदला हुआ नाम) जैसी कामगारों का कहना है कि उनकी मजदूरी कोविड-19 महामारी के बाद से नहीं बढ़ी है. वह महीने में केवल 12 डॉलर के बराबर कमाती हैं, जबकि उनके द्वारा बनाया गया एक अकेला सिगार बाजार में 116 डॉलर में बिकता है.
ईंधन की कमी के कारण सार्वजनिक परिवहन ठप है, जिससे मजदूरों को मीलों पैदल चलना पड़ रहा है. इसके अलावा, बेहतर भविष्य की तलाश में क्यूबा की एक चौथाई आबादी देश छोड़ चुकी है, जिससे सिगार उद्योग में कुशल श्रम की भारी कमी हो गई है. कई फैक्ट्रियां अब अपनी कुल क्षमता के केवल पांचवें हिस्से के साथ काम कर रही हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि क्यूबा के सिगारों की 'विशिष्टता' और 'दुर्लभता' फिलहाल उन्हें बाजार में टिकाए हुए है, क्योंकि कलेक्टर किसी भी कीमत पर इन्हें खरीदने को तैयार हैं. लेकिन यह रणनीति लंबे समय तक कारगर नहीं होगी.
निकारागुआ और डोमिनिकन रिपब्लिक जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धी अब क्यूबा के बाजार पर कब्जा कर रहे हैं.
जलवायु परिवर्तन, चक्रवातों की मार और अमेरिका की सख्त आर्थिक नीतियों ने क्यूबा के इस 'सुनहरे उद्योग' को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां से वापसी की राह कठिन नजर आती है.
मजदूरों के लिए यह स्थिति 1990 के दशक के उस कुख्यात आर्थिक अवसाद से भी बदतर है, जिसे 'विशेष काल' कहा जाता था. अब सवाल यह है कि क्या दुनिया का सबसे मशहूर सिगार इस तेल नाकेबंदी और श्रम संकट के धुएं में हमेशा के लिए खो जाएगा?