शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

यूएस-ईरान शांति समझौता संकट में: लेबनान बना बड़ी बाधा

C

CG Khabar

16 जून 2026, 06:48 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

ट्रंप-खामेनेई
ट्रंप-खामेनेई

वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही गुप्त बातचीत अब एक नए मोड़ पर आकर अटक गई है. ईरान के शीर्ष राजनयिक ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि इस संभावित शांति समझौते के तहत इजरायल को लेबनान से अपनी सेना पूरी तरह वापस बुलानी होगी. 


दूसरी ओर, इजरायल ने इस शर्त को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे इस अहम समझौते के खटाई में पड़ने और क्षेत्र में एक बार फिर पूर्ण युद्ध शुरू होने की आशंका गहरा गई है. 


हालांकि यह समझौता सीधे तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच हो रहा है, लेकिन इजरायल इसमें एक महत्वपूर्ण धड़ा है क्योंकि उसने बीते फरवरी में ईरान पर अमेरिकी हमलों में साथ दिया था और तब से वह लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्ला के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है.


इजरायली कदम पर ईरान और अमेरिका के विरोधाभासी दावे:


ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ तौर पर कहा कि दक्षिणी लेबनान पर इजरायल का कब्जा जारी रहना इस शांति समझौते का खुला उल्लंघन होगा. उनका मानना है कि जब तक इजरायली सेना इस युद्ध के दौरान कब्जाए गए क्षेत्रों से पीछे नहीं हटती, तब तक युद्ध को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता. 


हालांकि, इस समझौते की रूपरेखा पर नजर रखने वाले एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मसौदे में इजरायली वापसी की ऐसी कोई शर्त शामिल नहीं है. 


खुद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सोमवार को दोक थूक कहा था कि उनकी सेना जरूरत पड़ने तक लेबनान में डटी रहेगी. इस विरोधाभास ने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास को और बढ़ा दिया है, जिससे पहले से लागू अस्थाई युद्धविराम भी कमजोर पड़ता दिख रहा है.


लेबनान पर इजरायल की नीति से नाखुश दिखे राष्ट्रपति ट्रंप:


इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है. फ्रांस के आल्प्स में चल रहे जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के इतर ट्रंप ने इजरायली रणनीति पर खुलकर असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वह लेबनान और हिज्बुल्ला के मामले में इजरायल के रवैये से खुश नहीं हैं. 


ट्रंप का मानना है कि इजरायल का यह अभियान अनंत काल से खिंचता चला जा रहा है, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले 'महा-समझौते' पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. अब तक इजरायली हमलों में लेबनान में लगभग 4,000 लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं. 


ट्रंप ने इस उभरते हुए समझौते को अमेरिकी कांग्रेस के पास समीक्षा के लिए भेजने की इच्छा भी जताई है, ताकि इसे पूरी पारदर्शिता और समर्थन मिल सके.


होर्मुज जलडमरू मध्य को खोलने की कवायद और परमाणु मुद्दा:


इस संभावित समझौते का सबसे तात्कालिक असर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरू मध्य पर पड़ेगा, जो इस युद्ध के कारण प्रभावी रूप से बंद है. सूत्रों के मुताबिक, समझौते के लागू होते ही ईरान द्वारा जलडमरू मध्य को खोलना और अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाना दोनों काम एक साथ किए जाएंगे. 


इसके बाद, दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने को लेकर 60 दिनों की गहन बातचीत शुरू करेंगे. इस अवधि में ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को नष्ट करने या उसे कम करने के उपायों पर चर्चा होगी. 


हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के सामने अभी भी यह बड़ी चुनौती है कि इस परमाणु निगरानी और सत्यापन का काम कौन करेगा, क्योंकि ईरान के कई परमाणु ठिकाने पिछले साल अमेरिकी हमलों में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं.


पाकिस्तान की मध्यस्थता और जी-7 देशों का रुख:


इस पूरी शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान एक मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने बातचीत के आखिरी दिनों में लेबनान को भी इस समझौते के दायरे में लाने की जिद की थी, जिसके बाद लेबनान में भी युद्धविराम की बात शामिल की गई. 


जी-7 शिखर सम्मेलन में जुटे वैश्विक नेताओं ने भी इस समझौते को एक 'राजनयिक सफलता' बताते हुए इसका स्वागत किया है. 


फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका, ईरान और मध्यस्थों को बधाई दी है. 


फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि पश्चिमी देश होर्मुज जलमार्ग को शांतिपूर्ण ढंग से दोबारा खोलने में मदद के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अब सभी की निगाहें शुक्रवार को जेनेवा में होने वाले प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं, जो इस महीने भर पुराने विनाशकारी युद्ध के भविष्य का फैसला करेगा.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP