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अमेरिका-ईरान युद्ध विराम समझौते के परखच्चे उड़े

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08 जुल. 2026, 06:32 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप

नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष विराम (MoU) पूरी तरह से टूट चुका है. अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखे तेवर अपनाते हुए बुधवार को ईरान को तबाह करने की खुली धमकी दी है. 


ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिकी सेना ईरान के बिजली घरों और पानी को साफ करने वाले 'डिसैलिनेशन प्लांट्स' जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगी. इसके साथ ही उन्होंने ईरान के बेहद रणनीतिक और तेल निर्यात के मुख्य केंद्र 'खार्क द्वीप' (Kharg Island) को अपने कब्जे में लेने की भी बात कही है.


ट्रंप ने व्हाइट हाउस से बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका, ईरान पर लगातार दूसरी रात हवाई हमलों की तैयारी कर रहा है. मंगलवार को हुए अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि इससे ईरान को "भारी नुकसान" हुआ है और उनके रडार सिस्टम तबाह हो गए हैं, हालांकि इस दावे के पक्ष में कोई पुख्ता सबूत नहीं दिए गए हैं. 


खार्क द्वीप को लेकर ट्रंप ने बेहद कड़े लहजे में कहा, "शायद हम खार्क द्वीप पर कब्जा कर लेंगे. हम इसे अपने नियंत्रण में ले सकते हैं और वे (ईरान) इसके खिलाफ कुछ नहीं कर पाएंगे." ट्रंप ने यह भी संकेत दिए कि वे ईरान पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर सकते हैं.


ईरान के 8 सैनिकों की मौत, दी 'करारा जवाब' देने की चेतावनी:


दूसरी ओर, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' (IRNA) ने पुष्टि की है कि दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास और बुशहर में हुए अमेरिकी हवाई हमलों में ईरानी सेना के वायु और नौसैनिक बलों के आठ जवान मारे गए हैं. 


अमेरिकी हमलों से भड़के ईरानी सैन्य संगठन 'खातम अल-अंबिया' ने चेतावनी दी है कि यदि वाशिंगटन ने आगे कोई भी हमला किया, तो ईरान इसका "क्रशिंग रिस्पांस" यानी बेहद करारा और विनाशकारी जवाब देगा.


ईरान ने लगाया समझौता तोड़ने का आरोप:


ईरान के विदेश मंत्रालय और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने अमेरिका पर संघर्ष विराम समझौते (MoU) के उल्लंघन का सीधा आरोप लगाया है. ईरान के मुताबिक, अमेरिकी हमले समझौते की धारा 1 (सीजफायर), धारा 5 (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रबंधन, जो ईरान के पास है) और धारा 10 (ईरानी तेल निर्यात में छूट) का सीधा उल्लंघन हैं. 


बता दें कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' ईरान के लिए लाइफलाइन है, जहां से उसका 90 फीसदी से ज्यादा ऊर्जा निर्यात होता है.


वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता, तुर्की और खाड़ी देशों ने की शांति की अपील:


इस बढ़ते तनाव के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने उम्मीद जताई थी कि अमेरिका-ईरान समझौता क्षेत्र में शांति लाएगा, लेकिन साथ ही उन्होंने उकसावे वाली कार्रवाइयों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की चेतावनी भी दी. 


वहीं, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमलों की निंदा करते हुए खाड़ी देशों समेत दुनिया के कई अन्य मुल्कों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तुरंत युद्ध विराम पर लौटने की अपील की है. फिलहाल अमेरिकी हमलों के अगले दौर को लेकर कोई आधिकारिक समय सीमा सामने नहीं आई है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP