US ने अंतरिक्ष में तैनात किए हथियार, चीन और रूस ने जताई कड़ी आपत्ति
नई दिल्ली । डेस्क: अंतरिक्ष, जो कभी शीत युद्ध के दौरान केवल तकनीकी क्षमता और प्रतिष्ठा का प्रदर्शन करने का जरिया माना जाता था, अब विश्व शक्तियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक और सैन्य मोर्चे में बदल चुका है. अमेरिका की 'यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फोर्स' ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि अमेरिका ने पृथ्वी की कक्षा में हथियार तैनात किए हैं. स्पेस फोर्स के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन 'ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल' हथियारों को विशेष रूप से विरोधी देशों की किसी भी सैन्य कार्रवाई या हमले से अपने उपग्रहों और संयुक्त सैन्य बलों की रक्षा करने के लिए डिजाइन किया गया है.
इन हथियारों में काइनेटिक (भौतिक प्रभाव वाले) और नॉन-काइनेटिक (डिजिटल या ऊर्जा आधारित) दोनों प्रणालियां शामिल हैं, जिनका प्रयोग आक्रामक और रक्षात्मक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.
अमेरिका का यह कदम वर्ष 2019 में स्थापित की गई 'स्पेस फोर्स' की रणनीति का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य चीन और रूस से मिलने वाली संभावित सैन्य चुनौतियों का मुकाबला करना है.
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, चीन और रूस ऐसी प्रणालियों पर तेजी से काम कर रहे हैं जो न केवल अमेरिकी अंतरिक्ष सेवाओं पर उनकी निर्भरता समाप्त करती हैं, बल्कि अमेरिकी सैटेलाइट बुनियादी ढांचे को भी सीधे तौर पर बेअसर या नष्ट कर सकती हैं.
चीनी सेना का मानना है कि भविष्य के युद्धों में अंतरिक्ष की भूमिका निर्णायक होगी, जहां अंतरिक्ष-आधारित सूचना प्रणाली को नियंत्रित करके लंबी दूरी के सटीक सटीक हमलों को अंजाम दिया जा सकता है. वहीं रूस भी वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद अपनी विशाल अंतरिक्ष क्षमताओं के जरिए स्पेस में अपनी सैन्य बढ़त स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहा है.
अमेरिका की इस घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर तीव्र प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वाशिंगटन से अंतरिक्ष में अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने का आग्रह किया और स्पष्ट किया कि चीन अंतरिक्ष के किसी भी प्रकार के शस्त्रीकरण या इसे युद्ध क्षेत्र में बदलने का सख्त विरोध करता है.
इसी कड़ी में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रूस अंतरिक्ष को पूरी तरह से हथियार-मुक्त रखने के पक्ष में है और इस क्षेत्र के विसैन्यीकरण के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने का आह्वान करता है.
आज के आधुनिक दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था, संचार, और दैनिक तकनीकी अवसंरचना मुख्य रूप से उपग्रहों पर टिकी है, जिसके कारण अंतरिक्ष में बढ़ता यह सैन्य तनाव पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है.