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ट्रंप का UN पर तीखा प्रहार: UN को बताया 'खोखले शब्दों' का अड्डा

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23 सित. 2025, 04:14 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

ट्रंप
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न्यूयॉर्क । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) सत्र में पहली बार 2020 के बाद भाषण देते हुए संगठन पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने यूएन को 'खोखले शब्दों' का अड्डा करार दिया, जो युद्धों को सुलझाने में बिल्कुल नाकाम साबित हो रहा है. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने महज सात महीनों में सात युद्धों का अंत कर दिया, जिसमें भारत-पाकिस्तान का संकट भी शामिल है, लेकिन यूएन ने इस काम को छुआ तक नहीं.


ट्रंप ने कहा, "मैंने सात युद्ध समाप्त किए... कोई राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री, या फिर कोई अन्य देश ने कभी ऐसा कुछ भी कर पाने की कोशिश नहीं की. मैंने इसे सिर्फ सात महीनों में हासिल किया. यह कभी नहीं हुआ. मुझे इस पर बहुत गर्व है. अफसोस है कि मुझे ये काम खुद करने पड़े, जबकि यह यूएन का कर्तव्य था." 

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उन्होंने जोर देकर कहा कि यूएन ने इन युद्धों के दौरान किसी भी देश के नेताओं से बात करने या मदद की पेशकश करने की जहमत तक नहीं उठाई. "मैंने हर देश के नेताओं से सीधे बात की, लेकिन यूएन से एक फोन तक नहीं आया," उन्होंने तंज कसा.


हल्के-फुल्के अंदाज में ट्रंप ने यूएन की असलियत बयां की. उन्होंने हंसते हुए बताया कि संगठन से उन्हें बस दो चीजें मिलीं-एक लिफ्ट जो बीच रास्ते में रुक गई और एक टेलीप्रॉम्प्टर जो काम ही नहीं किया. "अगर फर्स्ट लेडी फिट न होतीं, तो गिर जातीं, लेकिन वे शानदार शेप में हैं. हम दोनों ही अच्छे हैं. और फिर टेलीप्रॉम्प्टर फेल. ये दो चीजें ही यूएन ने दीं," उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा.


ट्रंप ने यूएन के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए. "ये सब सोचने का मौका मुझे बाद में मिला, जब बातचीत हो चुकी थी-जो आसान नहीं थी. अगर यूएन वहां नहीं था, तो फिर इसका क्या मतलब? यूएन में इतनी जबरदस्त संभावनाएं हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह अपनी क्षमता के लायक नहीं दिख रहा," उन्होंने कहा.


रूस-यूक्रेन युद्ध पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने भारत और चीन को सीधे निशाने पर लिया. उन्होंने दोनों देशों पर रूस को तेल खरीदकर युद्ध का 'प्रमुख फंडिंग' करने का आरोप लगाया. 


साथ ही, नाटो देशों की भी आलोचना की कि वे भी रूसी ऊर्जा उत्पादों का आयात बंद करने में नाकाम रहे हैं. 


"चीन और भारत रूसी तेल खरीदकर चल रही जंग के मुख्य फंडर हैं. लेकिन शर्मनाक बात यह है कि नाटो देशों ने भी रूसी ऊर्जा का बहिष्कार नहीं किया. दो हफ्ते पहले मुझे यह पता चला और मैं खुश नहीं हुआ. वे खुद के खिलाफ जंग फंड कर रहे हैं," ट्रंप ने कहा.


युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप ने सख्त कदमों का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अगर रूस शांति समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो अमेरिका 'बहुत मजबूत और प्रभावी टैरिफ' लगाने को तैयार है. 


"ये टैरिफ खूनखराबे को जल्दी रोक देंगे. लेकिन इनके असरदार होने के लिए यूरोपीय देशों को-जो यहां मौजूद हैं-हमें समर्थन देना होगा और वही कदम उठाने होंगे," उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों से अपील की.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP