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संघर्ष विराम: मानवीय पीड़ा को कम करने शत्रुता का अंत आवश्यक- UN

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08 अप्रै. 2026, 07:34 AM 5 मिनट में पढ़ें 1

एंटोनियो गुटेरेस
एंटोनियो गुटेरेस

नई दिल्ली । डेस्क: संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के ऐतिहासिक संघर्ष विराम समझौते ने वैश्विक स्तर पर शांति की नई उम्मीद जगा दी है. इस समझौते के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोल देगा. शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आगामी शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता शुरू होने वाली है.


संयुक्त राष्ट्र: शांति और मानवीय सुरक्षा सर्वोपरि


संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस संघर्ष विराम का पुरजोर स्वागत किया है. उनके प्रवक्ता द्वारा जारी बयान के अनुसार, गुटेरेस ने सभी पक्षों से संघर्ष विराम की शर्तों का कड़ाई से पालन करने का आह्वान किया है ताकि क्षेत्र में एक स्थायी और व्यापक शांति का मार्ग प्रशस्त हो सके.


महासचिव ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिक जीवन की सुरक्षा और मानवीय पीड़ा को कम करने के लिए शत्रुता का अंत तत्काल आवश्यक है. उन्होंने इस महत्वपूर्ण समझौते की मध्यस्थता करने के लिए पाकिस्तान और अन्य सहायक देशों का आभार व्यक्त किया.


इराक: बातचीत और कूटनीति पर जोर


इराकी विदेश मंत्रालय ने संघर्ष विराम का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्र को संकटों से बचाने के लिए बातचीत की भाषा को प्राथमिकता देना आवश्यक है. इराक, जो पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र रहा है, ने दोनों देशों से तनाव बढ़ाने वाली किसी भी कार्रवाई से बचने और पूर्ण प्रतिबद्धता दिखाने का आग्रह किया है.मिस्र: क्षेत्रीय सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता


मिस्र ने इस संघर्ष विराम को कूटनीति के लिए एक "महत्वपूर्ण अवसर" करार दिया है. मिस्र के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करना और सैन्य अभियानों को पूरी तरह रोकना अनिवार्य है. उन्होंने क्षेत्र की स्थिरता के लिए पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई.


इजरायल: लेबनान में अभियान जारी रखने का संकेत


इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खतरे को कम करने के राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों का समर्थन किया. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष विराम लेबनान पर लागू नहीं होता है, जहाँ इजरायली सेना वर्तमान में हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी कार्रवाई कर रही है.


ओमान: संकट की जड़ों को खत्म करने की जरूरत


ओमान के विदेश मंत्रालय ने शांति प्रयासों के लिए पाकिस्तान की सराहना की. ओमान ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि इस संकट की जड़ों का समाधान ढूंढा जाए ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके.


एशियाई देशों की प्रतिक्रिया: जापान, इंडोनेशिया और मलेशिया


जापान: मुख्य कैबिनेट सचिव माइनोरू किहारा ने इसे "सकारात्मक कदम" बताया और कहा कि मध्य पूर्व में शांति जापान की सर्वोच्च प्राथमिकता है.


इंडोनेशिया: विदेश मंत्री यवोन मेवेंगकांग ने संप्रभुता के सम्मान की अपील की और लेबनान में मारे गए इंडोनेशियाई शांति सैनिकों की मौत की जांच की मांग उठाई.


मलेशिया: मलेशियाई विदेश मंत्रालय ने इसे वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम बताया.


ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड: आर्थिक संकट से राहत की उम्मीद


ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस और विदेश मंत्री पेनी वोंग ने एक संयुक्त बयान में कहा कि ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने से तेल और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया था. इस समझौते से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी. न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने भी चेतावनी दी कि स्थायी शांति के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.


जर्मनी: स्थायी शांति का लक्ष्य


जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने इस सफलता के लिए पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि आगामी वार्ताओं का लक्ष्य कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से युद्ध का "स्थायी अंत" होना चाहिए.


यूक्रेन: अमेरिका से रूस के खिलाफ भी ऐसी ही सख्ती की मांग


यूक्रेन ने भी इस समझौते का स्वागत किया है. यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा ने कहा कि "अमेरिकी दृढ़ संकल्प" काम करता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि वाशिंगटन अब इसी तरह की सख्ती दिखाकर रूस को भी यूक्रेन के खिलाफ युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर करेगा.


बता दें कि यह दो सप्ताह का संघर्ष विराम मध्य पूर्व में शांति की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अब पूरी दुनिया की निगाहें शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं, जहाँ से आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत की उम्मीद की जा रही है.

भारत: संघर्ष विराम का स्वागत, व्यापारिक स्थिरता पर दिया जोर


भारत सरकार ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते का औपचारिक रूप से स्वागत किया है. अपने आधिकारिक बयान में भारत ने क्षेत्र में जारी संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील की है, साथ ही सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' के माध्यम से बिना किसी बाधा के व्यापारिक आवाजाही सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है. हालांकि, विदेश मंत्रालय का यह बयान काफी कूटनीतिक रहा, जिसमें संघर्ष में शामिल किसी भी पक्ष का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया. उल्लेखनीय है कि अन्य देशों के विपरीत, भारत ने इस पूरी मध्यस्थता प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका का कोई विशेष उल्लेख नहीं किया और न ही आगामी वार्ता की मेजबानी के लिए उसे औपचारिक रूप से धन्यवाद दिया.



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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP