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तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद से दिया इस्तीफा

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22 मई 2026, 07:39 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

तुलसी गबार्ड
तुलसी गबार्ड

वाशिंगटन । डेस्क: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. गबार्ड ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक त्याग पत्र पोस्ट कर इस बात की सार्वजनिक घोषणा की. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि तुलसी गबार्ड आगामी 30 जून को प्रशासन छोड़ देंगी. 


ट्रंप ने उनके काम की सराहना करते हुए कहा कि तुलसी ने बेहतरीन काम किया है और प्रशासन को उनकी कमी खलेगी. गबार्ड के हटने के बाद राष्ट्रीय खुफिया कार्यालय के प्रधान उप निदेशक हारून लुकास इस पद की जिम्मेदारी कार्यवाहक क्षमता में संभालेंगे.

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अपने त्याग पत्र में तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति आभार व्यक्त करते हुए लिखा कि वह पिछले डेढ़ साल से राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के कार्यालय का नेतृत्व करने का अवसर देने और उन पर भरोसा जताने के लिए बेहद आभारी हैं. उन्होंने अपने इस अचानक इस्तीफे के पीछे बेहद भावुक और व्यक्तिगत कारण का हवाला दिया है. 


गबार्ड ने बताया कि उनके पति हाल ही में हड्डियों के एक दुर्लभ प्रकार के कैंसर (बोन कैंसर) से पीड़ित पाए गए हैं, और इस कठिन समय में वह अपने परिवार के साथ रहना चाहती हैं.


तुलसी गबार्ड का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है. वह 2013 से 2021 तक डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से अमेरिकी कांग्रेस की सदस्य रहीं और 2020 में उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी भी पेश की थी. हवाई नेशनल गार्ड की पूर्व सदस्य के रूप में इराक युद्ध के दौरान उनकी तैनाती हुई थी, जिसने उनकी युद्ध-विरोधी और गैर-हस्तक्षेपवादी विदेश नीति की सोच को आकार दिया. 


बाद में डेमोक्रेटिक पार्टी से मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी और ट्रंप का समर्थन किया. उन्होंने जो बाइडन प्रशासन की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा था कि बाइडन प्रशासन ने अमेरिका को परमाणु युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है.


हालांकि, डीएनआई के रूप में उनका कार्यकाल काफी उतार-चढ़ाव और विवादों से भरा रहा. उनकी युद्ध-विरोधी छवि के विपरीत ट्रंप प्रशासन ने ईरान और इजरायल के साथ मिलकर युद्ध की शुरुआत की, जिसका गबार्ड को बचाव करना पड़ा. 


वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो के सैन्य अपहरण के फैसले के दौरान भी उन्हें कथित तौर पर किनारे कर दिया गया था. इसके अलावा, राष्ट्रीय खुफिया परिषद (NIC) के अधिकारियों को बर्खास्त करने और जॉर्जिया में एक चुनाव केंद्र पर एफबीआई के छापे के दौरान उनकी मौजूदगी को लेकर भी विपक्षी डेमोक्रेटिक सांसदों ने उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे.


उनके इस्तीफे के बाद जहां रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट जैसे नेताओं ने गबार्ड की जवाबदेही तय करने वाली कार्यशैली की तारीफ की है, वहीं कई वैश्विक मामलों के जानकारों का मानना है कि उनका जाना ट्रंप प्रशासन की युद्ध नीतियों के आंतरिक अंतर्विरोधों को उजागर करता है. 


विशेषज्ञों को उम्मीद है कि प्रशासन से बाहर आने के बाद गबार्ड ईरान के साथ चल रहे मौजूदा संघर्ष और प्रशासनिक फैसलों पर खुलकर अपनी बात रखेंगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP