शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

'ट्रंप को युद्धविराम के लिए झुकना पड़ा'– मोहम्मद बागेर कलीबाफ़

C

CG Khabar

21 अप्रै. 2026, 06:41 PM 6 मिनट में पढ़ें 1

मोहम्मद बागेर कलीबाफ़
मोहम्मद बागेर कलीबाफ़

तेहरान । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य संघर्षों के बीच ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलीबाफ़ ने एक महत्वपूर्ण टेलीविजन साक्षात्कार में इस्लामाबाद में हुई वार्ताओं और युद्ध की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की है. पाकिस्तानी राजधानी में ईरानी वार्ता दल का नेतृत्व करने वाले कलीबाफ़ ने स्पष्ट किया कि ईरान ने इस 'तीसरे थोपे गए युद्ध' में न केवल अपनी सैन्य संप्रभुता की रक्षा की है, बल्कि अमेरिका को अपनी शर्तों पर बातचीत की मेज तक आने के लिए मजबूर किया है. 


उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान की जीत केवल सैन्य उपकरणों में नहीं, बल्कि उसके रणनीतिक डिजाइन और जनता के अटूट साहस में निहित है. कलीबाफ़ ने साक्षात्कार के दौरान उन दस प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला जो वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में ईरान के रुख को परिभाषित करते हैं.


1- ईरान की विजय का विश्वास और युद्ध का स्वरूप: 


कलीबाफ़ ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रहे हैं और उन्हें इस बार इसफ़हान में 1980 के 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ' (तबास) से भी बड़ी आपदा का सामना करना पड़ा है. उन्होंने इसे ईरान पर थोपा गया 'तीसरा युद्ध' बताया, जो कूटनीतिक वार्ताओं के बीच अमेरिकी चालाकी से शुरू हुआ था. उन्होंने बताया कि जून 2025 के 12 दिवसीय युद्ध के दौरान प्रतिक्रिया में देरी हुई थी, लेकिन इस बार सर्वोच्च कमांडर अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की शहादत के बावजूद, ईरानी सेना ने न्यूनतम समय में सटीक और विनाशकारी प्रहार किया. F-35 विमान को मार गिराने की घटना पर उन्होंने कहा कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक सचेत सैन्य प्रयास था, जिसने दुश्मन को ईरान की वास्तविक क्षमताओं का अहसास कराया. उन्होंने दावा किया कि ईरान ने लगभग 180 दुश्मन ड्रोनों को नष्ट किया है, जो उसकी बढ़ती रक्षात्मक और आक्रामक शक्ति का प्रमाण है.


2- सैन्य शक्ति की तुलना: 


जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान सैन्य रूप से अमेरिका से अधिक शक्तिशाली है, तो कलीबाफ़ ने स्वीकार किया कि अमेरिका और इजरायल के पास अधिक धन, आधुनिक उपकरण और सैन्य सुविधाएं हैं. हालांकि, उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध केवल संसाधनों से नहीं जीता जाता. ईरान ने एक 'असममित युद्ध' लड़ा और अपनी स्वयं की योजना और तैयारी के माध्यम से दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर किया. उनके अनुसार, दुश्मन के पास पैसा और तकनीक तो थी, लेकिन उनके पास सही रणनीति का अभाव था, जिसके कारण ईरान इस युद्ध में विजेता बनकर उभरा है.


3- ट्रंप द्वारा युद्धविराम की मांग के कारण: 


कलीबाफ़ ने बताया कि ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा व्यवहार में 'इजरायल फर्स्ट' में बदल गया है. युद्ध के मैदान में ईरान की मजबूत स्थिति को देखते हुए ट्रंप को युद्धविराम का आह्वान करना पड़ा. उन्होंने खुलासा किया कि दुश्मन का लक्ष्य ईरान को दो-तीन दिनों के भीतर आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना था, लेकिन ईरान 40 दिनों तक डटा रहा. उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध के 36वें दिन पाकिस्तान के माध्यम से एक 15-सूत्रीय प्रस्ताव आया था, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया और अपना 10-सूत्रीय एजेंडा रखा. अंततः, अमेरिका को ईरान की शर्तों पर चर्चा करने के लिए अस्थायी युद्धविराम की मांग करनी पड़ी.


4- युद्धविराम की घोषणा में ट्रंप की भूमिका: 


ईरानी पक्ष ने पाकिस्तान के माध्यम से स्पष्ट संदेश भेजा था कि यदि अमेरिका वास्तव में युद्धविराम चाहता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से अपने 'ट्रुथ सोशल' अकाउंट पर इसकी घोषणा करनी होगी. कलीबाफ़ ने इसे 'अधिकार की कूटनीति' करार दिया ताकि पूरी दुनिया जान सके कि शांति की पहल किसने की थी. इसके अलावा, ईरान ने शर्त रखी थी कि युद्धविराम में हिजबुल्लाह और अन्य प्रतिरोध मोर्चों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने इस संघर्ष में ईरान का भरपूर साथ दिया है.


5- होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण: 


कलीबाफ़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान में ईरानी सशस्त्र बलों के पूर्ण नियंत्रण में है. उन्होंने आश्वासन दिया कि ईरान उन देशों के लिए कोई बाधा उत्पन्न नहीं करना चाहता जो दुश्मन के साथ गठबंधन में नहीं हैं. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी देश युद्धविराम का उल्लंघन करने की कोशिश करेगा, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जिसमें अमेरिका ने माइन्सवीपर भेजने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान की चेतावनी के बाद उन्हें 15 मिनट के भीतर पीछे हटना पड़ा.


6- अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को कड़ी चेतावनी: 


इस्लामाबाद की वार्ताओं के दौरान कलीबाफ़ ने अमेरिकी प्रतिनिधियों को सीधे तौर पर चेतावनी दी थी कि यदि उनका माइन्सवीपर एक इंच भी आगे बढ़ा, तो ईरान सीधे तौर पर गोली चला देगा. इस सख्त रुख के बाद अमेरिकी कमांड को अपने जहाज को वापस बुलाने का आदेश देना पड़ा, जिससे एक बड़े संभावित संघर्ष को टाला जा सका.


7- अमेरिकी नाकाबंदी का मुद्दा: 


अमेरिका द्वारा ईरान की घेराबंदी करने के प्रयासों पर कलीबाफ़ ने कहा कि यह निर्णय उनकी अज्ञानता और अनाड़ीपन को दर्शाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि यह कैसी घेराबंदी है जहाँ बाकी सभी स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं लेकिन ईरान को रोकने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और ईरान को उकसाने वाली कार्रवाई बताया.


8- नाकाबंदी न हटने के परिणाम: 


कलीबाफ़ ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने अपनी नाकाबंदी नहीं हटाई, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि यदि ईरान को वहां से गुजरने से रोका जाता है, तो ईरान यह सुनिश्चित करेगा कि दुश्मन से जुड़ा कोई भी जहाज वहां से न गुजर पाए. उन्होंने ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के मनोवैज्ञानिक युद्ध से डरने वाला नहीं है और अंत तक अपनी संप्रभुता के लिए खड़ा रहेगा.


9- अमेरिका के साथ बातचीत की शुरुआत: 


उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्धविराम से 48 घंटे पहले तक अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई थी. ट्रंप के दावों को झूठा बताते हुए उन्होंने कहा कि वार्ता केवल तभी शुरू हुई जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से युद्धविराम का अनुरोध किया. ईरान की स्थिति को 10 बिंदुओं में संकलित किया गया था, जिसे नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोज्तबा खामेनेई ने स्वीकृति प्रदान की थी. कलीबाफ़ के अनुसार, कूटनीति भी एक तरह का संघर्ष है जिसके माध्यम से वे जनता के अधिकारों को सुनिश्चित कर रहे हैं.


10- व्यक्तिगत तैयारी और जनता का समर्थन: 


साक्षात्कार के अंत में कलीबाफ़ ने अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे देश के लिए अपने प्राण और सम्मान की आहुति देने को तैयार हैं. उन्होंने जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग 3 करोड़ ईरानियों ने 'जनफदा' (आत्म-बलिदान के लिए तैयार) अभियान में पंजीकरण कराया है. जब ईरान के बुनियादी ढांचे को बम से उड़ाने की धमकी दी गई, तो ईरानी परिवारों ने मानव श्रृंखला बनाकर उन स्थलों की रक्षा की. उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि ईरान की असली ताकत उसकी जनता की एकजुटता और सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन में निहित है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP